लालित्यम्

राग-विराग - 10.

*                  उस दिन हड़बड़ा कर तुलसीदास बड़े भिनसारे ही काशी से निकल पड़े थे. अंतर्मन से पुकार उठ रही थी - 'हे राम , अपनी शरण में ले लो!' 'अपने ऊ...
clicks 14  Vote 0 Vote  9:02am 29 Apr 2021

राग-विराग - 9.

*वापसी में रत्ना बहुत चुप-चुप थी . नन्ददास बत करने का प्रयत्न करते, तो हाँ,हूँ में उत्तर दे देती.वे उसकी मनस्थिति समझ रहे थे..कुछ देर चुप रह कर उन्होंने नया ...
clicks 91  Vote 0 Vote  8:16am 7 Apr 2021

राग-विराग - 8.

राग-विराग - 8.*उस दिन रत्नावली ने कहा था ,'मै हूँ न तुम्हारे साथ.' 'हाँ, तुम मेरे साथ हो.'पर यहाँ आकर वे हार जाते हैं .अपनी बात कैसे कहें? नहीं, नहीं कह सकते.रत्न...
clicks 23  Vote 0 Vote  9:03am 25 Mar 2021

राग-विराग - 7.

*जब से रत्ना ने तुलसी का सन्देश पाया है,मनस्थिति बदल गई है.कागज़ पर सुन्दर हस्तलिपि में अंकित वे गहरे नीले अक्षर जितनी बार देखती है. हर बार नये से लगते हैं .'...
clicks 50  Vote 0 Vote  6:12am 9 Mar 2021

राग - विराग : 6.

6..नन्ददास तुलसी से काशी में प्रायः ही भेंट करते रहते थे.'कुछ दिन टिक  कर एक स्थान पर रहो दद्दू, आराम रहेगा और लिखने-पढ़ने में भी सुविधा रहेगी.''समाज की वास...
clicks 40  Vote 0 Vote  11:45pm 24 Feb 2021

छोटे मियाँ सुभानअल्लाह!

 छोटे मियाँ सुभान अल्लाह. बचपन  में मेरा बेटा कुछ ज़्यादा ही अक्लमन्द था..बाल की खाल निकाल देता था. एक बार उसकी एक चप्पल कहीं इधर-उधर हो गई ,वह एक ही चपप...
clicks 49  Vote 0 Vote  6:38am 23 Feb 2021

राग-विराग -5.

 *हिमाचल-पुत्री गंगा, शिखरों से उतर उमँगती हुई सागर से मिलने चल पड़ती है. लंबी यात्रा के बीच मायके की याद आती है तो मानस लहरियाँ उस ओर घूम जाती हैं.  इस स्...
clicks 38  Vote 0 Vote  11:43pm 9 Feb 2021

चित्रगुप्त जी की बेरुख़ी -

* जब श्रीराम लंका विजय कर अयोध्या लौट रहे थे, उनके प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे, भरत जी ने सोचा कि उनका राज्य उन्हें अर्पण कर अब यथाशीघ्र भार-मुक्त हो...
clicks 38  Vote 0 Vote  2:52am 31 Jan 2021

राग-विराग - 4.

['मोइ दीनों संदेस पिय, अनुज नंद के हाथ।रतन समुझि जनि पृथक मोहि, जो सुमिरत रघुनाथ।।'                              - रत्नावली]*      *     *   ...
clicks 129  Vote 0 Vote  11:43pm 8 Jan 2021

विराग

 विरागजिस राह को उतावली में पार कर तुलसी रत्नावली से मिलने उसके पीहर जा पहुँचे थे, उसी पर ग्लानि-ग्रस्त,यंत्र-चलित से पग बढ़ाते  लौटे जा रहे हैं. अपने आ...
clicks 123  Vote 0 Vote  7:55am 10 Dec 2020
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