मेरे गीत !

हे प्रभु ! मेरे देश में ढोरों से बदतर, लोग क्यों - सतीश सक्सेना

हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर , ढोर क्यों ?जाहिलों को मुग्ध करने यह निरंतर शोर क्यों !अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए ये धूर्त, मेरे देश में , इतने ...
clicks 4  Vote 0 Vote  10:48am 16 Jan 2019

अब एक जमुना नाम का नाला है , मेरे शहर में -सतीश सक्सेना

खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घ...
clicks 20  Vote 0 Vote  2:25pm 5 Jan 2019

घर में बिन बुलाया मेहमान अलेक्ज़ेन्ड्रियान पैराकीट -सतीश सक्सेना

विश्व में हमारे अलावा अन्य कितने ही जीव हैं , जो हमारी तरह सांस लेते हैं, सोते हैं, जागते हैं, भोजन करते हैं , बात करते हैं, चलते हैं,उड़ते हैं मगर बहुत कम इंसान...
clicks 29  Vote 0 Vote  11:43am 19 Dec 2018

सारी धरती लोहा माने , इंसानी इकबाल का ! -सतीश सक्सेना

सत्येन दादा,उन लोकप्रिय लोगों में से एक हैं जिन्हें मैं सम्मान के साथ पढने ,समझने का प्रयत्न करता हूँ , हर एकके प्रति संवेदनशील, स्नेही सत्येन भंडारी को अ...
clicks 19  Vote 0 Vote  12:57pm 9 Dec 2018

मेहनत का कोई विकल्प नहीं -सतीश सक्सेना

अकेले लॉन्ग रन पर जाने में , मन बहुत व्यवधान पैदा करता है ! कल सुबह बेमन घर से निकला कि 10 km दौड़ना है अन्यथा Millennium City Marathon - 4th Edition 2nd Dec 2018​ जिसमें कई अंडर ब्रिज की चढ़ाइय...
clicks 13  Vote 0 Vote  9:12am 21 Nov 2018

मरना है तो,मरो सड़क पर मगर आज हों, ब्रेक बैरियर ! -सतीश सक्सेना

कई दिन बाद,आज सुबह, लम्बा दौड़ने का फैसला कर दौड़ते हुए 13.20 Km का फासला बिना रुके , बिना पानी के तय किया ! यह दूरी 1घंटा 36 मिनट में तय की गयी ! रनिंग के तुरंत बाद, बॉ...
clicks 76  Vote 0 Vote  11:59am 11 Nov 2018

कल दिवाली मन चुकी है ,जाहिलों के शहर में -सतीश सक्सेना

खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घ...
clicks 82  Vote 0 Vote  10:47am 8 Nov 2018

कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना -सतीश सक्सेना

इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना ! दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना घरों में बंद,मां बहनों पे,...
clicks 58  Vote 0 Vote  1:54pm 29 Oct 2018

मजबूत ह्रदय,पेन्क्रियास के लिए शरीर को दौड़ना सिखाएं -सतीश सक्सेना

भारत में पचास वर्ष से अधिक उम्र का हर तीसरा व्यक्ति, हार्ट आर्टरीज में रुकावट का ख़तरा लिए हुए है इसउम्र में हर व्यक्ति 60-80 प्रतिशत आर्टरिज़ ब्लॉक कर चुका हो...
clicks 44  Vote 0 Vote  9:05am 20 Oct 2018

शाब्बाश बुड्ढे ! यू कैन रन - सतीश सक्सेना

मेरी उम्र के लोगों को यह कविता पसंद नहीं आएगी , इसे बेहद दोस्ताना अंदाज़ में लिखा गया है और वे इसके आदी नहीं हैं , 50 वर्ष से ऊपर के लोग बच्चों की तरह हंसने में ...
clicks 22  Vote 0 Vote  6:29am 19 Oct 2018
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