उच्चारण

दोहे "कालातीत बसन्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--भाव सुप्त अब हो गये, हुई शायरी बन्द।नहीं निकलते कलम से, नये-पुराने छन्द।। --अँधियारा छाने लगा, गया भास्कर डूब।लिखने-पढ़ने से गया, मेरा मन अब ऊब।।-- थक...
clicks 4  Vote 0 Vote  5:00am 14 Oct 2019

दोहे "पावस का त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--शशि की किरणों में भरी, सबसे अधिक उजास।शरदपूर्णिमा धरा पर, लाती है उल्लास।१।--लक्ष्मीमाता धरा पर , आने को तैयार।शरदपूर्णिमा पर्व पर, लेती हैं अवतार।२...
clicks 3  Vote 0 Vote  7:49am 13 Oct 2019

दोहे "खुलकर हँसा मयंक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

शरद पूर्णिमा आ गयी, खुलकर हँसा मयंक।गंगा जी के नीर की, दूर हो गयी पंक।।--धान घरों में आ गये, कृषक रहे मुसकाय।अपने मन के छन्द को, रचते हैं कविराय।।--हरी-हरी उ...
clicks 5  Vote 0 Vote  7:19am 12 Oct 2019

श्रद्धांजलि "अमन चाँदपुरी"

हिन्दी साहित्य काउभरता हुआ युवा सिताराअमन चाँदपुरी नहीं रहा...*****************मेरे लिए यह व्यक्तिगत क्षति है।11 अप्रैल, 2016 कौ मैंनेखटीमा में आयोजित दोहाकार समागम म...
clicks 2  Vote 0 Vote  4:39pm 11 Oct 2019

दोहे "समझो मत खिलवाड़" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

झूठ-मूठ का भर गया, जब मन में अभिमान।तब से लेखन की हुई, उनकी बन्द दुकान।। --नहीं ब्लॉग है चल रहा, मुखपोथी खामोश।मिला एक आघात तो, हुआ पलायन जोश।। --दुर्गम पथ ...
clicks 3  Vote 0 Vote  7:24am 11 Oct 2019

ग़ज़ल "न शह कोई पड़ती, न फिर मात होती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

--न मजमून लिखते, न कुछ बात होतीबताओ तो कैसे मुलाकात होती--अगर दोस्ती है तो शिकवे भी होंगेन शक कोई होता, न कुछ घात होती--अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ातेन शह क...
clicks 8  Vote 0 Vote  7:47am 10 Oct 2019

ग़ज़ल "‘रूप’ की महताब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--भावनाओं का अचानक भर गया तालाब हैदेशभक्ति का वतन में आ गया सैलाब है --अब खुशी पसरी हुई दीवारों दर चहके हुएजगमगाती हैं मिनारें सज गयी मेहराब है--मानता लोहा ...
clicks 6  Vote 0 Vote  8:04am 9 Oct 2019

दोहे "दशहरा पर दस दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--रावण का वध हो गया, गयी बुराई हार।विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।१। --जो दुष्टों के दलन का, करता काम तमाम।उसका ही होता सदा, जग में ऊँचा नाम।२। --मर्या...
clicks 7  Vote 0 Vote  12:30pm 8 Oct 2019

दोहे "गयी बुराई हार?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--विजयादशमी ने दिया, दुनिया को उपहार।अच्छाई के सामने, गयी बुराई हार।।--विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।आज झूठ है जीतता, सत्य रहा है हार।।--रावण के जब बढ़ ...
clicks 0  Vote 0 Vote  7:01am 7 Oct 2019

दोहे "विविध दोहावली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

माता जी की कृपा से, मिला छन्द का दान।इसीलिए हूँ बाँटता, मैं दोहों में ज्ञान।१।--छोटी-छोटी बात पर, करते यहाँ विवाद।देते बालक-बालिका, कुल को बहुत विषा...
clicks 4  Vote 0 Vote  8:38am 6 Oct 2019
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