उच्चारण

दोहे "महापर्व में कुम्भ के, मिलता मन को चैन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कुम्भ शब्द बहुविकल्पी, जिसके अर्थ अनेक।मन में होना चाहिए, श्रद्धाभाव-विवेक।।--कुम्भराशि में हो गुरू, मेष राशि में सूर्य।तभी चमकती वो धरा, जैसे हो वैदूर्...
clicks 7  Vote 0 Vote  2:00am 15 Apr 2021

दोहे "सबको देते प्रेरणा, माता के नवरूप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--सबको देते प्रेरणा, माता के नवरूप।निष्ठा से पूजन करो, लेकर दीपक-धूप।।--सच्चे मन से कीजिए, माता का गुण-गान।माता तो सन्तान का, रखती पल-पल ध्यान।।--अभ्यागत को द...
clicks 14  Vote 0 Vote  2:00am 14 Apr 2021

दोहे "भीम राव अम्बेदकर, नमन तुम्हें शत् बार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')

--निर्बल-शोषित वर्ग पर, किया बहुत उपकार।भीम राव अम्बेदकर, नमन तुम्हें शत् बार।।--पढ़ने-लिखने का सदा, मन में रहा जुनून।भारत को तुमने दिया, उपयोगी कानून।।--नि...
clicks 17  Vote 0 Vote  10:11am 13 Apr 2021

गीत "जनमानस के अन्तस में आशाएँ मुस्काती हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--खेतों में बिरुओं पर जब, बालियाँ सुहानी आती हैं।जनमानस के अन्तस में तब, आशाएँ मुस्काती हैं।।--सोंधी-सोंधी महक उड़ रही, गाँवों के गलियारों में,खुशियों की भ...
clicks 18  Vote 0 Vote  4:00am 13 Apr 2021

दोहे "खान-पान में शुद्धता, सिखलाते नवरात्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--करिये नियम-विधान से, नौ दिन तक उपवास।जगदम्बा माँ आपकी, पूर्ण करेंगी आस।।-- शुद्ध आचरण में रहे, उज्जवल चित्र-चरित्र।प्रतिदिन तन के साथ में, मन को करो ...
clicks 17  Vote 0 Vote  2:00am 12 Apr 2021

कार यात्रा ♥ फोटोफीचर ♥ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

चल पड़े हैं हम सफर में, कैमरा ले हाथ में।कैद करने को नजारे, हमसफर है साथ में।।राह में हमको दिखाई दे गये, फलदार ठेले।रोक करके कार को क्रय कर लिए अंगूर-केले।।...
clicks 22  Vote 0 Vote  2:00am 11 Apr 2021

गीत "बेवफाई का कोई नही तन्त्र है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--बावफा के लिए तो नियम हैं बहुत,बेवफाई का कोई नही तन्त्र है।सर्प के दंश की तो दवा हैं बहुत,आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।--गन्ध देना ही है पुष्प का व्याकर...
clicks 25  Vote 0 Vote  7:49am 10 Apr 2021

ग़ज़ल "सितारों का भरोसा क्या, न जाने टूट जायें कब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--बहारों का भरोसा क्या, न जाने रूठ जायें कब?सहारों का भरोसा क्या, न जाने छूट जायें कब?--अज़ब हैं रंग दुनिया के, अज़ब हैं ढंग लोगों केइशारों का भरोसा क्या, न जान...
clicks 24  Vote 0 Vote  2:00am 9 Apr 2021

समीक्षा-छन्दविन्यास (काव्यरूप) (समीक्षक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

समीक्षा"छन्दविन्यास" (काव्यरूप)अर्थात् (काव्य लेखन कुञ्जी)(समीक्षक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')      छन्दों के बारे में कलम चलाना बहुत ही कठिन कार्य ह...
clicks 47  Vote 0 Vote  2:00am 8 Apr 2021

गीत "सूखे हुए छुहारे, जग को लुभा गये हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--अंगूर के सभी गुण,किशमिश में आ गये हैं।सूखे हुए छुहारे,जग को लुभा गये हैं।।--बूढ़े हुए तो क्या है,मन में भरा है यौवन,गीतों के जाम में ही,ढाला हुआ है जीवन,इस उ...
clicks 25  Vote 0 Vote  6:52pm 6 Apr 2021
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