उच्चारण

गीत "सूर्य भी शीत उगलता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--सन-सन शीतल चला पवन,सरदी ने रंग जमाया।ओढ़ चदरिया कुहरे की,सूरज नभ में शर्माया।।--जलते कहीं अलाव, सेंकता बदन कहीं है कालू,कोई भूनता शकरकन्द को, कोई ...
clicks 6  Vote 0 Vote  1:00am 16 Jan 2020

गीत "त्यौहारों की गठरी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

धनु से मकर लग्न में सूरज, आज धरा पर आया।गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।।गंगा जी के तट पर, अपनी खिचड़ी खूब पकाओ,खिचड़ी खाने से पहले, निर्मल जल से तुम ...
clicks 9  Vote 0 Vote  6:38am 15 Jan 2020

बालगीत "होती हाड़-कँपाई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता,लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता,बास...
clicks 8  Vote 0 Vote  4:37pm 14 Jan 2020

दोहे "उत्सव ललित-ललाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--उत्तरायणी पर्व के, भिन्न-भिन्न हैं नाम।आया लेकर हर्ष को, उत्सव ललित-ललाम।।--गंगा में डुबकी लगा, पावन करो शरीर।नदियों में बहता यहाँ, पावन निर्मल नीर।।--...
clicks 3  Vote 0 Vote  8:06am 14 Jan 2020

दोहे "सुधरेगा परिवेश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--उत्तरायणी पर्व की, मची हुई है धूम।अपने भारत देश में, लोग रहे हैं झूम।।--सरिताओं के घाट पर, लगने लगी कतार।गंगाजल अभिषेक को, सन्त चले हरद्वार।।--मकर राशि का स...
clicks 3  Vote 0 Vote  9:51am 13 Jan 2020

बाल गीत "जीत गया कुहरा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता,लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता,बास...
clicks 15  Vote 0 Vote  6:31am 13 Jan 2020

दोहे "फिर से नूतन हर्ष" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--लेकर आयी लोहड़ी, फिर से नूतन हर्ष।करते हैं सब कामना, मंगलमय हो वर्ष।।--शीतल-शीतल रात है, शीतल-शीतल भोर।उत्सव का माहौल है, पसरा चारों ओर।।--खुश हो करके लोहड़...
clicks 3  Vote 0 Vote  8:56am 12 Jan 2020

गीत "नगमे सुखद बहार के" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ढंग निराले होते जग में,  मिले जुले परिवार के।देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।--चमन एक हो किन्तु वहाँ पर, रंग-विरंगे फूल खिलें,मधु से मिश्रित व...
clicks 18  Vote 0 Vote  1:30am 12 Jan 2020

ग़ज़ल "हर खुशी तेरे नाम करते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--सुबह करते हैं, शाम करते हैं हर खुशी तेरे नाम करते हैं --ओढ़ करके ग़मों की चादर कोकाम अपना तमाम करते हैं--जब भी दैरो-हरम में जाते हैंहम तिरा एहतराम करते ह...
clicks 17  Vote 0 Vote  8:24am 11 Jan 2020

दोहे "जिजीविषा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

-- रहती है आकांक्षा, जब तक घट में प्राण।जिजीविषा के मर्म को, कहते वेद-पुराण।।-- जीने की इच्छा सदा, रखता मन में जीव।करता है जो कर्म को, वो होता सुग्रीव।।--आश...
clicks 2  Vote 0 Vote  6:52am 10 Jan 2020
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