उच्चारण

बालगीत "जोकर खूब हँसाये" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--जो काम नही कर पायें दूसरे,वो जोकर कर जाये।सरकस मे जोकर ही,दर्शक-गण को खूब रिझाये।--नाक नुकीली, चड्ढी ढीली,लम्बी टोपी पहने,उछल-कूद कर जोकर राजा,सबको खूब ह...
clicks 29  Vote 0 Vote  7:55am 21 Nov 2020

बालगीत "सीधा प्राणी गधा कहाता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी बालकृति नन्हें सुमन सेएक बालगीतकितना सारा भार उठाता।लेकिन फिर भी गधा कहाता।।रोज लाद कर अपने ऊपर,कपड़ों के गट्ठर ले जाता।वजन लादने वाले को भी,तरस न...
clicks 20  Vote 0 Vote  8:08am 20 Nov 2020

दोहे "छठपूजा त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उगते ढलते सूर्य का, छठपूजा त्यौहार।कोरोना के काल में, माता हरो विकार।। अपने-अपने नीड़ से, निकल पड़े नर-नार।सरिताओं के तीर पर, उमड़ा है संसार।। अस्तांच...
clicks 12  Vote 0 Vote  2:00am 19 Nov 2020

बालगीत "जन्मदिवस चाचा नेहरू का भूल न जाना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--जन्मदिवस चाचा नेहरू का, बच्चों भूल न जाना।ठाठ-बाट को छोड़ हमेशा, सादा जीवन अपनाना।।--नित्य-नियम से सदा सींचना, बगिया की फुलवारी।मत-मजहब के गुलदस्ते...
clicks 14  Vote 0 Vote  2:48pm 14 Nov 2020

दोहे "धन्वन्तरी जयन्ती-नर्क चतुर्दशी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--देती नरकचतुर्दशी, सबको यह सन्देश।साफ-सफाई को करो, सुधरेगा परिवेश।।--दीपक यम के नाम का, जला दीजिए आज।पूरी दुनिया से अलग, हो अपने अंदाज।।--जन्मे थे धनवन्तरी...
clicks 25  Vote 0 Vote  4:38pm 12 Nov 2020

गीत "आ रही दीपावली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।--क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिये,चाँद-तारों को करीने से, अगर रौशन किये,हार ...
clicks 29  Vote 0 Vote  7:57am 11 Nov 2020

ग़ज़ल "तंज करने से बिगड़ती बात हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मुफ्त में मिलती नहीं सौगात हैंतंज करने से बिगड़ती बात हैंहो सके तो वक्त से कुछ सीख लोसामने आकर खड़ी अब मात हैं सोचकर चौपाल में मुँह खोलनातल्खियाँ देती...
clicks 21  Vote 0 Vote  2:00am 9 Nov 2020

गीत "पुराना गाँव-नीम की छाँव" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

--जाने कहाँ खो गया अपना, आज पुराना गाँव।नहीं रही अपने आँगन में, आज नीम की छाँव।।--घर-घर में हैं टैलीवीजिन, सूनी है चौपाल,छाछ-दूध-नवनीत न भाता, चाय पिये...
clicks 16  Vote 0 Vote  2:00am 8 Nov 2020

दोहे "पर्व अहोई-अष्टमी, दिन है कितना खास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

पर्व अहोई-अष्टमी, दिन है कितना खास।जिसमें पुत्रों के लिए, होते हैं उपवास।।--कुलदीपक के है लिए, पर्व अहोई खास।होती अपने तनय पर, माताओं को आस।।--माताएँ इस...
clicks 18  Vote 0 Vote  11:12am 7 Nov 2020

अकविता "बचा लो पर्यावरण" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

घटते वन,बढ़ता प्रदूषण,गाँव से पलायनशहरों का आकर्षण।जंगली जन्तु कहाँ जायें?कंकरीटों के जंगल मेंक्या खायें?मजबूरी में वे भीबस्तियों में घुस आये!--क्या ...
clicks 20  Vote 0 Vote  7:44am 2 Nov 2020
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