उच्चारण

गीत "पौधे मुरझाये गुलशन में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सुख का सूरज नहीं गगन में।कुहरा पसरा है कानन में।।पाला पड़ता, शीत बरसता,सर्दी में है बदन ठिठुरता,तन ढकने को वस्त्र न पूरे,निर्धनता में जीवन मरता,पौधे मुरझ...
clicks 1  Vote 0 Vote  3:04pm 13 Dec 2018

तेरह दोहे "फूली-फूली रोटियाँ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

फूली रोटी देखकर, मन होता अनुरक्त।हँसी-खुशी से काट लो, जैसा भी हो वक्त।१।फूली-फूली रोटियाँ, सजनी रही बनाय।बाट जोहती है सदा, कब साजन घर आय।२।घर के खाने में भ...
clicks 5  Vote 0 Vote  4:20pm 12 Dec 2018

दोहे "महज नहीं संयोग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उलटफेर परिणाम में, महज नहीं संयोग।तानाशाही को सहन, कब तक करते लोग।।जनता की तो नाक में, पड़ती नहीं नकेल।जनमत पर ही है टिका, लोकतन्त्र का खेल।।जनसेवक जनतन्...
clicks 4  Vote 0 Vote  6:54pm 11 Dec 2018

दोहे "महावीर हनुमान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 पुरखों का इससे अधिक, होगा क्या अपमान।जातिवाद में बँट गये, महावीर हनुमान।।राजनीति के बन गये, दोनों आज गुलाम।जनता को लड़वा रहे, पण्डित और इमाम।।भजन-य...
clicks 6  Vote 0 Vote  5:44pm 10 Dec 2018

संस्मरण "वो पतला सा शॉल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वो पतला सा शॉल      आज से ठीक अट्ठारह साल पुरानी बात है। उत्तराखण्ड को जन्मे हुए उस समय एक मास ही हुआ था और उसके पहले मनोनीत मुख्यमन्त्री थे नित्य...
clicks 2  Vote 0 Vote  1:42pm 9 Dec 2018

ग़ज़ल "कल हो जाता आज पुराना" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन एक मुसाफिरखानाजो आया है, उसको जानाझूठी काया, झूठी छायामाया में मत मन भरमानासुख के सपने रिश्ते-नातेबहुत कठिन है इन्हें निभानाताकत है तो, सब है ...
clicks 9  Vote 0 Vote  3:46pm 8 Dec 2018

प्रकाशन "जय विजय के दिसम्बर अंक में मेरी कविता"

मैं तुमको मैना कहता हूँ,लेकिन तुम हो गुरगल जैसी।तुम गाती हो कर्कश सुर में,क्या मैना होती है ऐसी??सुन्दर तन पाया है तुमने,लेकिन बहुत घमण्डी हो।नहीं जानती प...
clicks 14  Vote 0 Vote  10:47am 7 Dec 2018

गीत "भवसागर भयभीत हो गया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो लगता था कभी पराया,वो ही अब मनमीत हो गया।पतझड़ में जो लिखा तराना,वो वासन्ती गीत हो गया।।अच्छे लगते हैं अब सपने,अनजाने भी लगते अपने,पारस पत्थर को छू करके,...
clicks 11  Vote 0 Vote  6:30am 6 Dec 2018

कुण्डलियाँ "मेरी दो कुण्डलियाँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!आज देखिए मेरी दो कुण्डलियाँ(1)खोल दो मन की खिड़कीखिड़की खोली जब सुबह, आया सुखद समीर।उपवन में मुझको दिखा, मोती जैसा नीर।।मोती जैसा नीर, घास पर चम...
clicks 15  Vote 0 Vote  11:45am 5 Dec 2018

दोहागीत "46वीं वैवाहिक वर्षगाँठ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मृग छौने की चाल अब, हुई बैल की चाल।धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।।जीवन के संग्राम में, किया बहुत संघर्ष।वैवाहिक जीवन हुआ, अब पैंतालिस वर्ष।।देख शिष...
clicks 16  Vote 0 Vote  3:22pm 4 Dec 2018
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