उच्चारण

दोहे "क्या होता है प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

छिपा हुआ है प्यार में, जीवन का विज्ञान।प्यार और मनुहार से, गुरू बाँटता ज्ञान।।बन जाते हैं प्यार से, सारे बिगड़े काम।प्यार और अनुराग तो, होता ललित-ललाम।।...
clicks 6  Vote 0 Vote  5:07pm 18 Jun 2018

"झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई की 160वीं पुण्यतिथि पर विशेष"

अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई की160वीं पुण्यतिथि पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान कीयह अमर कविता&nbs...
clicks 4  Vote 0 Vote  7:58am 17 Jun 2018

"पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत्-शत् बार"

पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत्-शत् बार।बिना आपके है नहीं, जीवन का आधार।।--बचपन मेरा खो गया, हुआ वृद्ध मैं आज।सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।--जब त...
clicks 0  Vote 0 Vote  7:46am 17 Jun 2018

दोहे "कैसे होंगे पार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

बहुत पुरानी है विधा, दोहों की श्रीमान।दोहों में ही निहित है, दुनिया भर का ज्ञान।।नदिया की धारा प्रबल, कैसे होंगे पार। नौका की मझधार में, टूट गयी पतवार।...
clicks 0  Vote 0 Vote  7:36am 17 Jun 2018

दोहे "कहो मुबारक ईद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

चाँद दूज का देखकर, जागी है उम्मीद।गले मिलो सब प्यार से, कहो मुबारक ईद।।--मौमिन को सन्देश ये, देते हैं रमजान।नेकी और खुलूस का, मौला का फरमान।।--जर्रे-जर्रे म...
clicks 4  Vote 0 Vote  7:28am 16 Jun 2018

दोहे "मौमिन के घर ईद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आदर हो हर पन्थ का, पढ़ो कुरान-मजीद।खुशियाँ लेकर आ गयी, मौमिन के घर ईद।।--सच्चे मन से कीजिए, पूजा और अजान।घर-घर नेमत ईद की, लाते हैं रमजान।।--जब तक साँस शरीर मे...
clicks 0  Vote 0 Vote  9:07am 15 Jun 2018

दोहे "मुखरित हैं अब चोर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

याचक बनकर आइए, माता जी के द्वार। वन्दन-पूजन विनय कर, माँगो कुछ उपहार।।मौन हुए साधू सभी, मुखरित हैं अब चोर। बाढ़ दिखाई दे रही, दौलत की सब ओर।।नाजुक होत...
clicks 6  Vote 0 Vote  8:41am 15 Jun 2018

दोहे "लोकतन्त्र में लोग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

कहने को आजाद हैं, लोकतन्त्र में लोग। सबको मिलते हैं कहाँ, लड्डू-मोहनभोग।।जब अपने ही देश में, शासक हों भयभीत।जनता फिर कैसे वहाँ, गाये सुख के गीत।।दाता थ...
clicks 8  Vote 0 Vote  8:18am 14 Jun 2018

दोहे "वाणी में सुर-तान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

ज्ञानदायिनी आप हो, सेवक है नादान।माता जी भर दीजिए, वाणी में सुर-तान।।सुमुखि गुलाबी वदन का,जबउतरा रंग। कविता की कमनीयता, तब से है बदरंग।।बदल गयी है लेख...
clicks 10  Vote 0 Vote  7:26am 13 Jun 2018

दोहे "गले पड़े हैं लोग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज गले लगते नहीं, गले पड़े हैं लोग। तन से तो संयोग है, मन में भरा वियोग।।जनता के ही तन्त्र में, जनता की है मात। धूप रूप की ढल गयी, आयी काली रात।।नहीं चल...
clicks 10  Vote 0 Vote  6:51am 12 Jun 2018
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