उच्चारण

दोहे "खिले कमल का फूल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

है बदरी-केदार की, महिमा अपरम्पार। मोदी मन्नत माँगने, आये  हर के द्वार।।सारी बाधायें हरो, हे बदरी-केदार।सिंहासन की नाव को, लगा दीजिए पार।।निष्कण्टक शास...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:15am 19 May 2019

दोहे "हिंसा का परिवेश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

ओछी हरकत वो करें, जिनके टेढ़े कान।कहने को इंसान हैं, लेकिन हैं हैवान।।पक्षपात से पूर्ण हैं, सरकारी आदेश।आज हमारे देश में, हिंसा का परिवेश।।बने हुए आयो...
clicks 10  Vote 0 Vote  5:30am 18 May 2019

बुद्धपूर्णिमा पर कुछ दोहे "आओ गौतम बुद्ध" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जो ले जाये जो लक्ष्य तक, वो पथ होता शुद्ध।भारत तुम्हें पुकारता, आओ गौतम बुद्ध।।बोधि वृक्ष की छाँव में, मिला बुद्ध को ज्ञान।अन्तर्मन से छँट गया, तम का सब अज...
clicks 5  Vote 0 Vote  6:30am 17 May 2019

गीत "चलने से कम दूरी होगी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')

महक रहा है मन का आँगन,दबी हुई कस्तूरी होगी।दिल की बात नहीं कह पाये,कुछ तो बात जरूरी होगी।।सूरज-चन्दा जगमग करते,नीचे धरती, ऊपर अम्बर।आशाओं पर टिकी ज़िन्दग...
clicks 8  Vote 0 Vote  7:49am 16 May 2019

दोहे "काने करते राज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सबको परखा आज तक, देखी सबकी रीत।मतगणना के बाद में, गई भाड़ में प्रीत।।--बातें बहुत लुभावनी, नहीं इरादे नेक।मछुआरों ने ताल में, जाल दिया है फेंक।।--सब अपन...
clicks 11  Vote 0 Vote  7:17am 15 May 2019

दोहे "अपना चौकीदार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आरोपों की हो जहाँ, भाषण में बरसात।राजनीति के खेल में, वहाँ न होती मात।।--शह पर शह पड़ती बहुत, चलते फिर भी चाल।क्रोधित होकर नोंचते, नेता सिर के बाल।।--दल-दल मे...
clicks 10  Vote 0 Vote  12:36pm 14 May 2019

गीत "गुलमोहर लुभाता है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब सूरज यौवन में भरकरअनल धरा पर बरसाता है।लाल अँगारा रूप बनाकर,तब गुलमोहर लुभाता है।।मुस्काता है सौम्य सन्त सा,कुदरत की क्या माया है।खुद गरमी को खा...
clicks 8  Vote 0 Vote  6:00am 13 May 2019

दोहे "माता का सम्मान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

प्रतिदिन माता दिवस है, रोज करो गुणगान।प्रतिदिन होना चाहिए, माता का सम्मान।।--ममता का पर्याय है, जग में माँ का नाम।माँ की पूजा से मिलें, हमको चारों धाम।।--हो...
clicks 19  Vote 0 Vote  5:42pm 11 May 2019

गद्य-पद्य "मातृ दिवस" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मातृदिवस पर विशेष--जो बच्चों को जीवन के, कर्म सदा सिखलाती है। ममता जिसके भीतर होती, माता वही कहाती है--माँ ने वाणी को उच्चारण का ढंग बतलाया है,माता ने ...
clicks 1  Vote 0 Vote  6:43am 11 May 2019

"हँसता गाता बचपन की भूमिका" (डॉ.राष्ट्रबन्धु)

“हँसता गाता बचपन”की भूमिका औरशीर्षक गीतहँसता-खिलता जैसा,इन प्यारे सुमनों का मन है।गुब्बारों सा नाजुक,सारे बच्चों का जीवन है।।नन्हें-मुन्नों के मन को,म...
clicks 19  Vote 0 Vote  3:38pm 10 May 2019
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