उच्चारण

बालकविता "मुझे मिली है सुन्दर काया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गोरा-चिट्टा कितना अच्छा।लेकिन हूँ सूअर का बच्चा।।लोग स्वयं को साफ समझते।लेकिन मुझको गन्दा कहते।।मेरी बात सुनो इन्सानों।मत अपने को पावन मानों।।भरी हु...
clicks 8  Vote 0 Vote  4:49pm 15 Jan 2018

दोहे "तितली करती नृत्य" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उत्तरायणी पर्व को, ले आया नववर्ष।तन-मन में सबके भरा, कितना नूतन हर्ष।१।--आया है उल्लास का, उत्तरायणी पर्व।झूम रहे आनन्द में, सुर-मानव-गन्धर्व।२।--जल में डु...
clicks 19  Vote 0 Vote  4:43pm 13 Jan 2018

दोहे "आई फिर से लोहिड़ी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आई फिर से लोहिड़ी, लेकर नवल उमंग।अब फिर से बजने लगे, ढोलक और मृदंग।।आयी फिर से लोहड़ी, देने को सौगात।कम होगा अब देश में, जाड़े का उत्पात।।पर्व लोहिड़ी क...
clicks 16  Vote 0 Vote  4:44pm 12 Jan 2018

बालकविता "सीधी-सादी मेरी मैया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरी गैया बड़ी निराली। सीधी-सादी, भोली-भाली।।सुबह हुई काली रम्भाई। मेरा दूध निकालो भाई।।हरी घास खाने को लाना। उसमें भूसा नही मिलाना।।उसका बछड़ा बड़ा स...
clicks 24  Vote 0 Vote  6:43pm 11 Jan 2018

दोहे "कुहरा चारों ओर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब से लोगों को मिला, नया-नवेला साल।तब से सरदी बढ़ गयी, बिगड़ गये हैं हाल।।सूरज है शरमा रहा, कुहरा चारों ओर।शीतल हुई दुपहरी, शीतल ही है भोर।।लोग लगाकर टकटकी,...
clicks 23  Vote 0 Vote  11:17am 11 Jan 2018

दोहे "विश्व हिन्दीदिवस" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दुनिया में हिन्दीदिवस, भारत की है शान।सारे जग में बन गयी, हिन्दी की पहचान।।--चारों तरफ मची हुई, अब हिन्दी की धूम।भारतवासी शान से, रहे खुशी में झूम।।--हिन्दी...
clicks 21  Vote 0 Vote  7:14am 10 Jan 2018

गीत "जग है एक मुसाफिरखाना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गुजर गया है साल पुराना।गाओ फिर से नया तराना।।सब कुछ तो पहले जैसा है,लक्ष्य आज भी तो पैसा है,सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला,वही ठौर है, वही ठिकाना।नित्य नये अनुभ...
clicks 26  Vote 0 Vote  11:29am 9 Jan 2018

गीत "हमारा सूरज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पूरब से जो उगता है और पश्चिम में छिप जाता है।यह प्रकाश का पुंज हमारा सूरज कहलाता है।।  रुकता नही कभी भी चलता रहता सदा नियम से, दुनिया को नियमित होने क...
clicks 28  Vote 0 Vote  12:30pm 8 Jan 2018

बालकविता "रहता है हरदम चौकन्ना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

यह है अपना चिंकू प्यारा।पूरे घर का राजदुलारा।।इसका रंग बहुत है काला।लेकिन है यह भोला-भाला।।बड़े चाव से खाता गन्ना।रहता है हरदम चौकन्ना।।चिंकू तो है शा...
clicks 21  Vote 0 Vote  6:58am 7 Jan 2018

विविध दोहावली "हाथों में पिस्तौल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वेदों ने हमको दिया, आदिकाल में ज्ञान।इनके जैसा है नहीं, जग में छ्न्दविधान।१।विषय-वस्तु में सार हो, लेकिन हो लालित्य।दुनियाँ को जो दे दिशा, वो ही है साह...
clicks 12  Vote 0 Vote  10:57am 6 Jan 2018
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