उच्चारण

दोहे "सिमट गया संसार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।रिश्तों-नातों में नहीं, पहले जैसा प्यार।।झगड़ा है सुख के लिए, अब अपनों के बीच।बिन पानी के डूबते, तट पर देखो नीच।।आपाधापी-स...
clicks 4  Vote 0 Vote  12:40pm 18 Aug 2018

दोहे "उजड़ गया है नीड़"श्रद्धांजलि अटलबिहारी वाजपेई

अटल बिहारी की नहीं, मिलती कहीं मिसाल।लीन हो गया शून्य में, भारत माँ का लाल।।हंस पलायन कर गया, उजड़ गया है नीड़।दर्शन करने देह का, उमड़ी भारी भीड़।।आने-जान...
clicks 7  Vote 0 Vote  12:36pm 17 Aug 2018

दोहे "बंजर होते खेत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सीखो सबक विनाश से, समझो कुछ संकेत। मुखरित होकर कह रहे, बंजर होते खेत।१। सोच-समझकर खोलना, अपनी वाणी मित्र। जिह्वा देती है बता, अच्छा-बुरा चरित्र।२।&nb...
clicks 9  Vote 0 Vote  8:04am 16 Aug 2018

दोहे "नागपंचमी-तीज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नागपञ्चमी-हरेला, रक्षाबन्धन-तीज।घर-घर में बनते यहाँ, व्यञ्जन आज लजीज।१।--श्रावण शुक्ला पञ्चमी, बहुत खास त्यौहार।नागपञ्चमी आज भी, श्रद्धा का आधार।२।--महा...
clicks 13  Vote 0 Vote  12:03pm 15 Aug 2018

दोहे "स्वतन्त्रता का मन्त्र" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 मुशकिल से हमको मिला, आजादी का तन्त्र।सबको जपना चाहिए, स्वतन्त्रता का मन्त्र।।आजादी के साथ में, मत करना खिलवाड़।तोड़ न देना एकता, ले मजहब की आड़।।मत-मज...
clicks 16  Vote 0 Vote  4:17pm 14 Aug 2018

दोहे "काँटे और गुलाब" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सीमाओं पर हो रहा, बद से बदतर हाल। रोज काल है लीलता, माताओं के लाल।।जनमानस की है यहाँ, याददाश्त कमजोर। इसीलिए हैं जीतते, लोकतन्त्र में चोर।।नेताओं की ...
clicks 20  Vote 0 Vote  11:39am 13 Aug 2018

दोहे "सावन की है तीज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सावन आया झूम के, रिमझिम पड़ें फुहार।धानी धरती ने किया, हरा-भरा सिंगार।।आते सावन मास में, कई बड़े त्यौहार।उत्सव प्राणीमात्र के, जीवन के आधार।।साजन सजनी क...
clicks 11  Vote 0 Vote  6:00am 12 Aug 2018

दोहे "गुर्गे देते बाँग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जब से सत्ता में बढ़ी, शैतानों की माँग।मुर्गे पढ़ें नमाज को, गुर्गे देते बाँग।।--हुए नशे में चूर सब, पड़ी कूप में भाँग।एक दूसरे की सभी, खीँच रहे हैं टाँग।।--स...
clicks 17  Vote 0 Vote  7:38am 11 Aug 2018

गीत "लगी है झड़ी सावन की" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

चमकती बिजुरिया चपला,गगन में मेघ हैं छाये।मिटाने प्यास धरती की,जलद जल धाम ले आये।धरा की घास थी सूखी,त्वचा थी राख सी रूखी,हुई घनघोर जब बारिस,नदी-नाले उफन आय...
clicks 15  Vote 0 Vote  3:38pm 10 Aug 2018

दोहे "कर लेना कुछ गौर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

लोगों मेरी बात पर, कर लेना कुछ गौर।ठण्डा करके खाइए, भोजन का हर कौर।।अफरा-तफरी में नहीं, होते पूरे काम।मनोयोग से कीजिए, अपने काम तमाम।।कर्मों से ही भाग्य क...
clicks 18  Vote 0 Vote  5:30am 9 Aug 2018
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