उच्चारण

"दोहा छन्द"आलेख (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"दोहा छन्द"      दोहा छन्द अर्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम एवं तृतीय चरण में तेरह-तेरह मात्राएँ तथा द्वितीय एवं चतुर्थ चरण में ग्यारह-ग्यारह मात्र...
clicks 88  Vote 0 Vote  1:00am 29 Nov 2021

ग़ज़ल "खून पीना जानते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

काम कुछ करते नही बातें बनाना जानते हैं।महफिलों में वो फकत जूते ही खाना जानते हैं।।मुफ्त का खाया है अब तक और खायेंगे सदा,जोंक हैं वो तो बदन का खून पीना जान...
clicks 87  Vote 0 Vote  2:00am 24 Nov 2021

दोहे "खुद को करो पवित्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--कातिक की है पूर्णिमा, सजे हुए हैं घाट।सरिताओं के रेत में, मेला लगा विराट।।--एक साल में एक दिन, आता है त्यौहार।बहते निर्मल-नीर में, डुबकी लेना मार।।--गंगा तट...
clicks 89  Vote 0 Vote  2:00am 20 Nov 2021

गीत "खादी-खाकी की केंचुलियाँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

खादी और खाकी दोनों में बसते हैं शैतान।अचरज में है हिन्दुस्तान! अचरज में है हिन्दुस्तान!! --तन भूखा है, मन रूखा है खादी वर्दी वालों का,सुर तीखा है, उर सूखा...
clicks 113  Vote 0 Vote  2:00am 15 Nov 2021

दोहे "छठ माँ हरो विकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

उगते ढलते सूर्य का, छठपूजा त्यौहार।कोरोना के काल में, छठ माँ हरो विकार।। अपने-अपने नीड़ से, निकल पड़े नर-नार।सरिताओं के तीर पर, उमड़ा है संसार।। ...
clicks 99  Vote 0 Vote  10:13am 10 Nov 2021

गीत "भइयादूज का तिलक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर, कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।लग जाये किसी की न तुमको नजर,दूज के इस तिलक में यही भावना।।चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,...
clicks 61  Vote 0 Vote  2:00am 6 Nov 2021

गीत "गीत-ग़ज़लों का तराना, गा रही दीपावली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिये,चाँद-तारों को करीने से, अगर रौशन किये,हार ज...
clicks 107  Vote 0 Vote  4:00pm 30 Oct 2021

दोहे "माता के बिन लग रहे, फीके सब त्यौहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आज अहोई-अष्टमी, दिन है कितना खास।जब तक माँ जीवित रही, रखती थी उपवास।।वो घर स्वर्ग समान है, जिसमें माँ का वास।अब मेरा माँ के बिना, मन है बहुत उदास।।बचपन मेरा...
clicks 96  Vote 0 Vote  2:00am 28 Oct 2021

गीत "गोमुख से सागर तक जाती" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नद-नालों, सरिताओँ को जो,खुश हो करके अंग लगाती।धरती की जो प्यास बुझाती,वो पावन गंगा कहलाती।। आड़े-तिरछे और नुकीले,पाषाणों को तराशती है।पर्वत से मै...
clicks 88  Vote 0 Vote  2:00am 16 Oct 2021

दोहे "उसका होता राम सा, जग में ऊँचा नाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--रावण का वध हो गया, गयी बुराई हार।विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।१। --जो दुष्टों के दलन का, करता काम तमाम।उसका होता राम सा, जग में ऊँचा नाम।२। --मर्या...
clicks 106  Vote 0 Vote  2:00am 15 Oct 2021
 
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