उच्चारण

गीत "जनमानस के अन्तस में आशाएँ मुस्काती हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--खेतों में बिरुओं पर जब, बालियाँ सुहानी आती हैं।जनमानस के अन्तस में तब, आशाएँ मुस्काती हैं।।--सोंधी-सोंधी महक उड़ रही, गाँवों के गलियारों में,खुशियों की भ...
clicks 66  Vote 0 Vote  4:00am 13 Apr 2021

दोहे "खान-पान में शुद्धता, सिखलाते नवरात्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--करिये नियम-विधान से, नौ दिन तक उपवास।जगदम्बा माँ आपकी, पूर्ण करेंगी आस।।-- शुद्ध आचरण में रहे, उज्जवल चित्र-चरित्र।प्रतिदिन तन के साथ में, मन को करो ...
clicks 42  Vote 0 Vote  2:00am 12 Apr 2021

कार यात्रा ♥ फोटोफीचर ♥ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

चल पड़े हैं हम सफर में, कैमरा ले हाथ में।कैद करने को नजारे, हमसफर है साथ में।।राह में हमको दिखाई दे गये, फलदार ठेले।रोक करके कार को क्रय कर लिए अंगूर-केले।।...
clicks 33  Vote 0 Vote  2:00am 11 Apr 2021

गीत "बेवफाई का कोई नही तन्त्र है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--बावफा के लिए तो नियम हैं बहुत,बेवफाई का कोई नही तन्त्र है।सर्प के दंश की तो दवा हैं बहुत,आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।--गन्ध देना ही है पुष्प का व्याकर...
clicks 67  Vote 0 Vote  7:49am 10 Apr 2021

ग़ज़ल "सितारों का भरोसा क्या, न जाने टूट जायें कब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--बहारों का भरोसा क्या, न जाने रूठ जायें कब?सहारों का भरोसा क्या, न जाने छूट जायें कब?--अज़ब हैं रंग दुनिया के, अज़ब हैं ढंग लोगों केइशारों का भरोसा क्या, न जान...
clicks 40  Vote 0 Vote  2:00am 9 Apr 2021

समीक्षा-छन्दविन्यास (काव्यरूप) (समीक्षक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

समीक्षा"छन्दविन्यास" (काव्यरूप)अर्थात् (काव्य लेखन कुञ्जी)(समीक्षक-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')      छन्दों के बारे में कलम चलाना बहुत ही कठिन कार्य ह...
clicks 71  Vote 0 Vote  2:00am 8 Apr 2021

गीत "सूखे हुए छुहारे, जग को लुभा गये हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--अंगूर के सभी गुण,किशमिश में आ गये हैं।सूखे हुए छुहारे,जग को लुभा गये हैं।।--बूढ़े हुए तो क्या है,मन में भरा है यौवन,गीतों के जाम में ही,ढाला हुआ है जीवन,इस उ...
clicks 41  Vote 0 Vote  6:52pm 6 Apr 2021

गीत "नवसम्वतसर मन में चाह जगाता है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--जब बसन्त का मौसम आता,गीत प्रणय के गाता उपवन।मधुमक्खी-तितली-भँवरे भी,खुश हो करके करते गुंजन।।--पेड़ और पौधें भी फिर से,नवपल्लव पा जाते हैं,रंग-बिरंगे सुमन ...
clicks 58  Vote 0 Vote  7:30am 6 Apr 2021

ग़ज़ब "हार भी जरूरी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--जीत को पचाने को, हार भी जरूरी हैप्यार को मनाने को, रार भी जरूरी है--घूमते हैं मनचले अलिन्द बाग में बहुतफूल को बचाने को, ख़ार भी जरूरी है--जंग लगे शस्त्र से, य...
clicks 47  Vote 0 Vote  7:18am 5 Apr 2021

ग़ज़ल "हार भी जरूरी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--जीत को पचाने को, हार भी जरूरी हैप्यार को मनाने को, रार भी जरूरी है--घूमते हैं मनचले अलिन्द बाग में बहुतफूल को बचाने को, ख़ार भी जरूरी है--जंग लगे शस्त्र से, य...
clicks 36  Vote 0 Vote  7:18am 5 Apr 2021
 
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