नन्हे सुमन

बालगीत "पूरी दुनिया में कोरोना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रोग अगर दिखलाई दे तो,कभी न करना जादू-टोना।अपने पैर पसार चुका है,पूरी दुनिया में कोरोना।।बाहर नहीं निकलना घर से,घर में पूरा समय बिताओ।हर घंटे हाथों को धोओ,...
clicks 222  Vote 0 Vote  1:00am 1 Apr 2020

बालकविता "सब बच्चों का प्यारा मामा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सारे जग से न्यारा मामा।सब बच्चों का प्यारा मामा।।नभ में कैसा दमक रहा है।चन्दा कितना चमक रहा है।।कभी बड़ा छोटा हो जाता।और कभी मोटा हो जाता।।करवाचौथ पर्...
clicks 429  Vote 0 Vote  10:27am 27 Oct 2018

विश्व कविता-दिवस "भूखी गइया कचरा चरती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

विश्व कविता दिवस परप्रस्तुत है आज एक बाल कवितासड़क  किनारे जो भी पाया,पेट उसी से यह भरती है।मोहनभोग समझकर,भूखी गइया कचरा चरती है।।  कैसे खाऊँ मैं कच...
clicks 334  Vote 0 Vote  5:50pm 21 Mar 2018

बालगीत "होली का मौसम अब आया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रंग-गुलाल साथ में लाया।होली का मौसम अब आया।पिचकारी फिर से आई हैं,बच्चों के मन को भाई हैं,तन-मन में आनन्द समाया।होली का मौसम अब आया।।गुझिया थाली में पसरी ह...
clicks 564  Vote 0 Vote  5:13am 8 Mar 2017

बालकविता "झूम-झूमकर मच्छर आते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

झूम-झूमकर मच्छर आते।कानों में गुञ्जार सुनाते।।नाम ईश का जपते-जपते।सुबह-शाम को खूब निकलते।। बैठा एक हमारे सिर पर।खून चूसता है जी भर कर।।नहीं यह बिल्कु...
clicks 593  Vote 0 Vote  5:51am 1 Mar 2017

बालकविता "खेतों में शहतूत उगाओ"

कितना सुन्दर और सजीला।खट्टा-मीठा और रसीला।।हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत बहुत गुण वाले।।पारा जब दिन का बढ...
clicks 491  Vote 0 Vote  7:00am 21 Feb 2017

बालकविता "बच्चों का संसार निराला" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीधा-सादा. भोला-भाला।बच्चों का संसार निराला।।बचपन सबसे होता अच्छा।बच्चों का मन होता सच्चा।पल में रूठें, पल में मानें।बैर-भाव को ये क्या जानें।।प्यारे-...
clicks 467  Vote 0 Vote  5:39am 20 Feb 2017

बालकविता "तीखी-मिर्च कभी मत खाओ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

तीखी-तीखी और चर्परी।हरी मिर्च थाली में पसरी।।तोते इसे प्यार से खाते।मिर्च देखकर खुश हो जाते।।सब्ज़ी का यह स्वाद बढ़ाती।किन्तु पेट में जलन मचाती।।जो ज...
clicks 474  Vote 0 Vote  7:31pm 15 Feb 2017

बालकविता "सबके प्यारे बन जाओगे" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मैं तुमको गुरगल कहता हूँ,लेकिन तुम हो मैना जैसी।तुम गाती हो कर्कश सुर में,क्या मैना होती है ऐसी??सुन्दर तन पाया है तुमने,लेकिन बहुत घमण्डी हो।नहीं जानती प...
clicks 517  Vote 0 Vote  5:48am 13 Feb 2017

बालकविता "क.ख.ग.घ. सिखलाऊँगी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

चित्रांकन - कु. प्राचीमम्मी देखो मेरी डॉल।खेल रही है यह तो बॉल।।पढ़ना-लिखना इसे न आता।खेल-खेलना बहुत सुहाता।।कॉपी-पुस्तक इसे दिलाना।विद्यालय में नाम ल...
clicks 543  Vote 0 Vote  7:16pm 10 Feb 2017
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