"धरा के रंग"

संस्मरण "देवदूत कांस्टेबिल दीपक कुमार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

      खटीमा से 27 किमी दूर कुमाऊँ का पर्वतीय द्वार टनकपुर नाम का एक छोटा नगर है। जहाँ की एक बुजुर्ग महिला कमला देवी का गठिया-वात का इलाज अमर भारती आयुर्व...
clicks 178  Vote 0 Vote  4:46pm 30 Mar 2020

"अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस-मैं नारी हूँ...!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नारी की व्यथामैंधरती माँ की बेटी हूँइसीलिए तोसीता जैसी हूँमैं हूँकान्हा के अधरों सेगाने वाली मुरलिया,इसीलिए तोगीता जैसी हूँ।मैंमन्दालसा हूँ,जीजाबाई ...
clicks 590  Vote 0 Vote  6:47am 8 Mar 2015

"नये साल का सूरज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

मैं नये साल का सूरज हूँ,हरने आया हूँ अँधियारा। मैं स्वर्णरश्मियों से अपनी,लेकर आऊँगा उजियारा।।चन्दा को दूँगा मैं प्रकाश,सुमनों को दूँगा मैं सुवास,मै...
clicks 622  Vote 0 Vote  2:23pm 1 Jan 2015

"नमन और प्रणाम..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सूर, कबीर, तुलसी, के गीत,सभी में निहित है प्रीत।आजलिखे जा रहे हैं अगीत,अतुकान्तसुगीत, कुगीतऔर नवगीत।जी हाँ!हम आ गये हैंनयी सभ्यता में,जीवन कट रहा हैव्यस...
clicks 550  Vote 0 Vote  7:56am 5 Nov 2014

‘‘आशा के दीप जलाओ’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जलने को परवाने आतुर, आशा के दीप जलाओ तो। कब से बैठे प्यासे चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।। मधुवन में महक समाई है, कलियों में यौवन सा छाया, मस्ती में दीवा...
clicks 656  Vote 0 Vote  9:25pm 26 Sep 2014

"बादल का चित्रगीत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग"सेएक गीतबादल का चित्रगीतकहीं-कहीं छितराये बादल,कहीं-कहीं गहराये बादल।काले बादल, गोरे बादल,अम्बर में मँडराये बादल। उमड़-...
clicks 602  Vote 0 Vote  4:55pm 13 Jul 2014

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) "पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा"

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग"से एक गीतपा जाऊँ यदि प्यार तुम्हाराकंकड़ को भगवान मान लूँ, पा जाऊँ यदि प्यार तुम्हारा! काँटों को वरदान मान लूँ, पा जाऊ...
clicks 544  Vote 0 Vote  5:31pm 27 Jun 2014

"आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है...
clicks 626  Vote 0 Vote  11:02am 24 Jun 2014

"अमलतास के पीले झूमर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग"से एक गीत"अमलतास के पीले झूमर"तपती हुई दुपहरी में, झूमर जैसे लहराते हैं।कंचन जैसा रूप दिखाते, अमलतास भा जाते हैं।।जब सूर...
clicks 558  Vote 0 Vote  5:43pm 15 Jun 2014

"मखमली लिबास" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग"से एक गीत"मखमली लिबास" मखमली लिबास आज तार-तार हो गया! मनुजता को दनुजता से आज प्यार हो गया!!  सभ्यताएँ मर गईं हैं, आदमी क...
clicks 619  Vote 0 Vote  6:35am 5 Jun 2014
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