लम्हों का सफ़र

726. पुनर्जीवित

पुनर्जीवित ******* मैं पुनर्जीवित होना चाहती हूँ   अपने मन का करना चाहती हूँ   छूटते संबंध टूटते रिश्ते   वापस पाना चाहती हूँ   वह सब जो निषेध ...
clicks 122  Vote 0 Vote  11:48pm 9 Jun 2021

725. पर्यावरण (20 हाइकु)

पर्यावरण (20 हाइकु) ******* 1. द्रौपदी-धरा   दुशासन मानव   चीर हरण।   2. पाँचाली-सी भू   कन्हैया भेजो वस्त्र   धरा निर्वस्त्र।   3. पेड़ ढक...
clicks 134  Vote 0 Vote  11:24pm 5 Jun 2021

724. जीने का करो जतन

जीने का करो जतन ******* काँटों की तक़दीर में, नहीं होती कोई चुभन   दर्द है फूलों के हिस्से, मगर नहीं देते जलन।   शमा तो जलती है हर रात, ग़ैरों के लिए   ख़...
clicks 113  Vote 0 Vote  10:00pm 4 Jun 2021

721. अब डर नहीं लगता

अब डर नहीं लगता ******* अब डर नहीं लगता!   न हारने को कुछ शेष   न किसी जीत की चाह   फिर किस बात से डरना?   सब याद है   किस-किस ने प्यार किया   कि...
clicks 129  Vote 0 Vote  8:56pm 18 May 2021

720. कोरोना

 कोरोना ******* 1. ओ कोरोना,   है कैसा व्यापारी तू   लाशों का करता व्यापार तू   और कितना रुलाएगा   कब तक यूंँ तड़पाएगा   हिम्मत हार गया संसा...
clicks 396  Vote 0 Vote  12:33am 1 May 2021

718. प्रेम में होना

प्रेम में होना   *******   प्रेम की पराकाष्ठा कहाँ तक   बदन के घेरों में   या मन के फेरों में?   सुध-बुध बिसरा देना प्रेम है   या फिर स्वयं का बो...
clicks 135  Vote 0 Vote  11:18pm 18 Apr 2021

717. ज़िन्दगी भी ढलती है

ज़िन्दगी भी ढलती है ******* पीड़ा धीरे-धीरे पिघल, आँसुओं में ढलती है   वक़्त की पाबन्दी है, ज़िन्दगी भी ढलती है।   अजब व्यथा है, सुबह और शाम मुझमें नहीं  ...
clicks 218  Vote 0 Vote  11:11pm 9 Apr 2021

716. होली मइया (होली पर 21 हाइकु)

होली मइया (होली पर 21 हाइकु) ******* 1. उन्मुक्त रंग   ऋतुराज बसंत   फगुआ गाते।   2. बंधन मुक्त   भेदभाव से मुक्त,   होली संदेश।   3. फगुआ ...
clicks 109  Vote 0 Vote  1:42pm 29 Mar 2021

713. रिश्ते हैं फूल (रिश्ता पर 20 सेदोका)

रिश्ते हैं फूल (रिश्ता पर 20 सेदोका)******* 1. रिश्ते हैं फूल   भौतिकता ने छीने   रिश्तों के रंग-गंध   मुरझा गए   नहीं कोई उपाय   कैसे लौटे सुग...
clicks 107  Vote 0 Vote  11:06pm 12 Mar 2021

712. अब नहीं हारेगी औरत

अब नहीं हारेगी औरत******* जीवन के हर जंग में हारती है औरत   ख़ुद से लड़ती-भिड़ती हारती है औरत   सुख समेटते-समेटते हारती है औरत   दुःख छुपाते-छुपाते हारत...
clicks 246  Vote 0 Vote  10:38pm 8 Mar 2021
 
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