ग़ज़लगंगा.dg

चिता को आग देने में हथेली ही जला बैठे

कहां आवाज़ देनी थी, कहां दस्तक लगा बैठे.चिता को आग देने में हथेली ही जला बैठे.मिला मौका तो वो ज़न्नत को भी दोज़ख बना बैठे.जिन्हें सूरज उगाना था, दीया तक को ब...
clicks 15  Vote 0 Vote  5:34pm 10 Jul 2018

कत्त्आ

जिसे ज़न्नत बनाना था उसे दोजख़ बना बैठे.चिता को आग देने में हथेली ही जला बैठे.ख़ुदा जाने ये कोई हादसा था या कि नादानीजहां सूरज उगाना था, दीया तक को बुझा बैठ...
clicks 1  Vote 0 Vote  2:07am 4 Jul 2018

चार तिनकों का आशियाना हुआ

चार तिनकों का आशियाना हुआ,आंधियों में मेरा ठिकाना हुआ।जिसको देखे बिना करार न था,उसको देखे हुए जमाना हुआ।मरना जीना तो इस जमाने मेंं,मिलने-जुलने का इक बहा...
clicks 1  Vote 0 Vote  2:10pm 11 Jun 2018

ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी

ग़म की धूप न खाओगे तो खुशियों की बरसात न होगी.दिन की कीमत क्या समझोगे जबतक काली रात न होगी.जीवन के इक मोड़ पे आकर हम फिर से मिल जाएं भी तोलब थिरकेंगे, दिल मचल...
clicks 17  Vote 0 Vote  5:51pm 8 Jun 2018

अच्छे दिनों का कौन करे इंतजार और.

आखिर कहां से लाइए सब्रो-करार और.अच्छे दिनों का कौन करे इंतजार और.कुछ रहगुजर पे धूल भी पहले से कम न थीकुछ आपने उड़ा दिए गर्दो-गुबार और.बिजली किधर से दौड़ रही...
clicks 0  Vote 0 Vote  5:06pm 7 Jun 2018

रह गए सारे कलंदर इक तरफ

वक्त के सारे सिकंदर इक तरफ.इक तरफ सहरा, समंदर इक तरफ.इक तरफ तदबीर की बाजीगरीऔर इंसां का मुकद्दर इक तरफ.आस्मां को छू लिया इक शख्स नेरह गए सारे कलंदर  इक तरफ...
clicks 15  Vote 0 Vote  1:30am 6 Sep 2017

सर पटककर रह गए दीवार में.

जो यकीं रखते नहीं घरबार में.उनकी बातें किसलिए बेकार में.दर खुला, न कोई खिड़की ही खुलीसर पटककर रह गए दीवार में.बस्तियां सूनी नज़र आने लगींआदमी गुम हो गया ब...
clicks 12  Vote 0 Vote  1:01am 2 Sep 2017

बस मियां की दौड़ मस्जिद तक न हो.

चाल वो चलिए किसी को शक न हो.बस मियां की दौड़ मस्जिद तक न हो.सल्तनत आराम से चलती नहींसरफिरा जबतक कोई शासक न हो.सांस लेने की इजाजत हो, भलेज़िंदगी पर हर किसी का ...
clicks 16  Vote 0 Vote  5:58pm 26 Aug 2017

दोनों तरफ के लोग हैं जिद पर अड़े हुए

हम उनकी उंगलियों में थे कब से पड़े हुए.कागज में दर्ज हो गए तो आंकड़े हुए.ऊंची इमारतों में कहीं दफ्न हो गईंवो गलियां जिनमें खेलके हम तुम बड़े हुए.मुस्किल ह...
clicks 76  Vote 0 Vote  2:52pm 15 Aug 2017

चुप लगा जाना अलग है, बेजु़बानी और है.

दास्तां उनकी अलग, मेरी कहानी और हैमैं तो दरिया हूं मेरे अंदर रवानी और है.कौन समझेगा हमारी कैफ़ि‍यत अबके बरसकह रही है कुछ ज़बां लेकिन कहानी और है.वो अगर गूं...
clicks 52  Vote 0 Vote  2:23pm 2 Oct 2016
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