चिकोटी

आधार, फेसबुक और मियां की बेचैनी

मियांमेरे लंगोटिया यार हैं। मोहल्ले में ही रहते हैं। जीवन का अच्छा और बुरा समय हमने साथ बिताया है। दिल में छिपी जो बात अपनी बेगम से न कह पाते, मुझसे कह देत...
clicks 5  Vote 0 Vote  11:04am 16 Jan 2018

एक बे-किताब लेखक होने की व्यथा-कथा

मैंकेवल अपनी ही निगाह में लेखक हूं। अपने लेखक होने पर केवल मुझे ही गर्व है। लेकिन पत्नी मुझे लेखक नहीं मानती। गर्व करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। यों, ...
clicks 14  Vote 0 Vote  2:26pm 15 Jan 2018

बदनामियां अच्छी हैं!

बदनामियांअब दाग जितनी ही अच्छी लगने लगी हैं! एक बार बदनाम हो लिए तो फिर जन्म-जिंदगी भर की ऐश ही ऐश। कहीं भी किसी को अपना परिचय देने की आवश्यकता नहीं। नाम के...
clicks 23  Vote 0 Vote  5:09pm 31 Dec 2017

ढोल-नगाड़े की सार्थकता

ढोल-नगाड़ोंसे मुझे बहशत-सी होती है। आस-पास बज रहे ढोल-नगाड़े की आवाज भी अगर कानों में पड़ जाए तो मैं घंटों घर से बाहर नहीं निकलता। ऐसा लगता है कि कोई बहुत दूर ख...
clicks 12  Vote 0 Vote  5:02pm 31 Dec 2017

घोटाले होते ही नहीं!

इसबात का यकीं तो मुझे बचपन से था कि घोटाले नहीं होते! अभी 2 जी पर आए फैसले ने मेरे यकीं और अधिक पुख्ता कर दिया कि वाकई, घोटाले जैसा कुछ होता ही नहीं। ये तो हमा...
clicks 13  Vote 0 Vote  4:57pm 31 Dec 2017

एक न हुए घोटाले की पटकथा

घोटालाअदृश्य होता है। किसी को होता हुआ कभी दिखाई नहीं देता। सब हवा में तीर छोड़ते रहते हैं कि फलां घोटाला हुआ, फलां नेता-मंत्री दोषी है। अपने मन के वहम को क...
clicks 31  Vote 0 Vote  9:50am 27 Dec 2017

डिजिटल बदनामियां

इसभीषण डिजिटल जमाने में आप पर हर पल निगाह रखने वालो की कमी नहीं। किसी न किसी बहाने वो आप की हर बात जानने को उत्सुक यों रहते हैं मानो उनका आप पर कोई किताब लि...
clicks 55  Vote 0 Vote  10:16am 22 Dec 2017

शादी, खाना और लिफाफा

शादीचाहे अपने कितने भी करीबी या दूर वाले की हो लिफाफा मैं खाने के स्वादनुसार ही देता हूं। यानी, जैसा खाना वैसा लिफाफा! अमां, पैसे कोई पेड़ पर तो उगते नहीं कि...
clicks 20  Vote 0 Vote  10:00am 22 Dec 2017

प्याज से मोहब्बत

प्याजसे मुझे उतनी ही मोहब्बत है जितनी शीरीं को फरहाद से थी। व्हाट्सएप्प चलाए बिना दो पल को फिर भी रह सकता हूं किंतु प्याज बिना एक पल भी नहीं। प्याज मेरा आ...
clicks 48  Vote 0 Vote  9:43am 6 Dec 2017

नाक पर भला क्या गर्व करना!

मुझेअपनी नाक पर कभी गर्व नहीं रहा! रहे न रहे। कटे न कटे। नाक ही तो है कोई इतिहास थोड़े ही कि हर वक़्त ध्यान रखता फिरूं- कौन इसके साथ छेड़छाड़ कर रहा है, कौन सम्मा...
clicks 49  Vote 0 Vote  9:52am 4 Dec 2017
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