हँसता गाता बचपन

बालकविता "हरियाली तीज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 --अब हरियाली तीज आ रही,मम्मी मैं झूलूँगी झूला।देख फुहारों को बारिश की,मेरा मन खुशियों से फूला।।--कई पुरानी भद्दी साड़ी,बहुत आपके पास पड़ी हैं।इतने दिन स...
clicks 100  Vote 0 Vote  3:25pm 24 Jul 2020

बालगीत "गुलमोहर पर छाई लाली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--लाल रंग के सुमन सुहाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।--रूप अनोखा, गन्ध नहीं है,कागज-कलम निबन्ध नहीं है,उपवन से सम्बन्ध नहीं है,गरमी में हैं खिलते जाते।लोग...
clicks 185  Vote 0 Vote  11:30am 9 May 2020

बालकविता "मुर्गा हूँ मैं सिर्फ नाम का" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 रोज सवेरे मैं उठ जाता।कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता।।कहता भोर हुई उठ जाओ।सोने में मत समय गँवाओ।।आलस छोड़ो, बिस्तर त्यागो।मैं भी जागा, तुम भी जागो।।पहले दि...
clicks 2567  Vote 0 Vote  8:36am 30 Oct 2018

""पारसमणि"में मेरी बालकविता "पाठशाला"का राजस्थानी में अनुवाद"

हनुमानगढ़ (राजस्थान) से प्रकाशित पत्रिका "पारसमणि"में मेरी बालकविता "पाठशाला" का राजस्थानी में अनुवाद प्रकाशित हुआ है।अनुवादक है पं. दीनदयाल शर्म...
clicks 551  Vote 0 Vote  7:17am 1 Sep 2014

"मैं भी जागा, तुम भी जागो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन"सेबालकविता"मैं भी जागा, तुम भी जागो"रोज सवेरे मैं उठ जाता।कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता।।कहता भोर हुई उठ जाओ।सोने में मत समय गँ...
clicks 640  Vote 0 Vote  7:00am 5 Jul 2014

"आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों।फेस बुक पर मेरे मित्रों में एक श्री केवलराम भी हैं। उन्होंने मुझे चैटिंग में आग्रह किया कि उन्होंने एक ब्लॉगसेतु के नाम से एग्रीगेटर बनाया है...
clicks 608  Vote 0 Vote  11:03am 24 Jun 2014

"कच्चे घर अच्छे रहते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन"सेबालकविता"कच्चे घर अच्छे रहते हैं"सुन्दर-सुन्दर सबसे न्यारा।प्राची का घर सबसे प्यारा।।खुला-खुला सा नील गगन है।हरा-भरा ...
clicks 614  Vote 0 Vote  6:14am 11 Jun 2014

"सुराही" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन"सेबालकविता"सुराही""पानी को ठण्डा रखती है,मिट्टी से है बनी सुराही।बिजली के बिन चलती जाती,देशी फ्रिज होती सुखदायी।।छोटी-ब...
clicks 639  Vote 0 Vote  8:07pm 2 Jun 2014

"ठोकर से छू लो हमें.." (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरे काव्य संग्रह "धरा के रंग"सेएक गीत सुनिए..."ठोकर से छू लो हमें.."अर्चना चावजी के स्वर मेंआप इक बार ठोकर से छू लो हमें,हम कमल हैं चरण-रज से खिल जायेगें!प...
clicks 666  Vote 0 Vote  11:51am 22 May 2014

"बालकविता-सूअर का बच्चा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 अपनी बालकृति "हँसता गाता बचपन"से बालकविता"सूअर का बच्चा" गोरा-चिट्टा कितना अच्छा।लेकिन हूँ सूअर का बच्चा।।लोग स्वयं को साफ समझते।लेकिन मुझको गन...
clicks 578  Vote 0 Vote  3:12pm 18 May 2014
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