कविता मंच

अगर औरत बिना संसार होता / गिरधारी सिंह गहलोत

अगर औरत बिना संसार होता।वफ़ा का ज़िक्र फिर बेकार होता।ये किस्से हीर लैला के न मिलते।हर एक आशिक़ यहाँ बेजार होता।क़लम ख़ामोश रहता शायरों का बिना रुजगार ...
clicks 23  Vote 0 Vote  4:00am 12 Jan 2018

अगर उदास है वो तो कोई मजबूरी है / डी. एम. मिश्र

अगर उदास है वो तो कोई मजबूरी हैकोई वज़ह है अगर दो दिलों में दूरी है।आज जी भर के चाँदनी को अपनी देखेंगेहमारे पास अभी एक रात पूरी है।आप जाँये तो मुस्करा के य...
clicks 4  Vote 0 Vote  4:00am 11 Jan 2018

अगर आदमी ख़ुद से हारा न होता / मधुभूषण शर्मा 'मधुर'

                          अगर आदमी ख़ुद से हारा न होता ,                          ख़ुदा क...
clicks 7  Vote 0 Vote  4:00am 10 Jan 2018

अंधेरा मिटता नहीं है मिटाना पड़ता है / भारतभूषण पंत

अंधेरा मिटता नहीं है मिटाना पड़ता हैबुझे चराग़ को फिर से जलाना पड़ता है।ये और बात है घबरा रहा है दिल वर्नाग़मों का बोझ तो सब को उठाना पड़ता है।कभी कभी तो ...
clicks 6  Vote 0 Vote  4:00am 9 Jan 2018

अंगारों पर चलकर देखें / इसाक अश्क

अंगारों पर चलकर देखेदीपशिखा-सा जलकर देखेगिरना सहज सँभलना मुश्किलकोई गिरे, सँभलकर देखेदुनिया क्या, कैसी होती हैकुछ दिन भेस बदलकर देखेजिसमें दम हो वह गा...
clicks 3  Vote 0 Vote  4:00am 8 Jan 2018

अंगारों के तकिये रखकर / ज्ञान प्रकाश विवेक

अंगारों के तकिए रखकरहम बारूदों के घर सोयेसन्नाटों के जल में हमनेबेचेनी के शब्द भिगोयेटी-हाऊस में शोर-शराबाजंगल में सन्नाटा रोयेएक कैलेंडर खड़ा हुआ हैत...
clicks 17  Vote 0 Vote  4:00am 7 Jan 2018

अँधेरे चारों तरफ़ / राहत इन्दौरी

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगेचिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगेलहूलोहान पड़...
clicks 19  Vote 0 Vote  12:00pm 6 Jan 2018

अँधेरा जब मुक़द्दर बन के घर में बैठ जाता है / डी. एम. मिश्र

अँधेरा जब मुक़द्दर बन के घर में बैठ जाता हैमेरे कमरे का रोशनदान तब भी जगमगाता है।किया जो फ़ैसला मुंसिफ़ ने वो बिल्कुल सही लेकिनख़ुदा का फ़ैसला हर फ़ैसले...
clicks 8  Vote 0 Vote  12:00pm 5 Jan 2018

'मीर'कोई था 'मीरा'कोई लेकिन उनकी बात अलग / निश्तर ख़ानक़ाही

छोड़ो मोह! यहाँ तो मन को बेकल बनना पड़ता हैमस्तों के मयख़ाने को भी मक़तल बनना पड़ता हैसारे जग की प्यास बुझाना, इतना आसाँ काम है क्या?पानी को भी भाप में ढलकर...
clicks 7  Vote 0 Vote  12:00pm 4 Jan 2018

'आए भी वो गए भी वो' / शमशेर बहादुर सिंह

'आए भी वो गए भी वो'--गीत है यह, गिला नहींहमने य'कब कहा भला, हमसे कोई मिला नहीं।आपके एक ख़याल में मिलते रहे हम आपसेयह भी है एक सिलसिला गो कोई सिलसिला नहीं।गर्म...
clicks 6  Vote 0 Vote  11:34am 3 Jan 2018
[ Prev Page ] [ Next Page ]
 
CONTACT US ADVERTISE T&C

Copyright © 2009-2013