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‘सामाजिक परिवर्तन में बाधक हिन्दुत्व’ दलित चिंतक एच एल दुसाध

 ‘सामाजिक परिवर्तन में बाधक हिन्दुत्व’दलित चिंतक एच एल दुसाध का दुसाध प्रकाशन से आया हजार पृष्ठों का ग्रंथ है। श्री दुसाध पत्रकारिता को समर्पित अके...
clicks 1  Vote 0 Vote  10:42am 19 Nov 2018

वेदों में क्‍या है (1) - कुमार मुकुल

वेदों की आधारभूमी स्पष्ट है कि खेतिहर समाज के लिए वर्षा प्राथमिक जरूरत है, इसी तरह बादलों से वर्षा कराने वाले इंद्र की पूजा भी स्वाभाविक है।वेद आदिग्रंथ...
clicks 0  Vote 0 Vote  10:59am 17 Nov 2018

दास्‍तोएवस्‍की के प्रेम - कुमार मुकुल

उपन्‍यास जगत की महान हस्‍ती और अपराध और दंडजैसी सार्वकालिक कृति के सर्जकदास्‍वोएवस्‍की के जीवन को हम देखें तो वह भी अपराध और दंड के जटिल संजाल में गुत्...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:26am 16 Nov 2018

क्रोध, चिंता आदि भावावेग सोद्देश्‍य होते हैं - कुमार मुकुल

सहज बुद्धि के आधार पर मन पर नियंत्राण रखना ही जीवन का सबसे बड़ा अर्थ है। एडलर लिखते हैं कि ``जीवन का अर्थ है, मैं अपने साथी मनुष्यों में दिलचस्पी लूं, सम्प...
clicks 0  Vote 0 Vote  11:12am 15 Nov 2018

संयोगों की सत्‍ता ईश्‍वरीय सत्‍ता का निषेध करती है - कुमार मुकुल

समय का संक्षिप्‍त इतिहास  कुछ नोटससंयोगों की सत्‍ता ईश्‍वरीय सत्‍ता का निषेध करती है : स्‍टीफेन हाकिंग 'पूरा सच कभी किसी एक के हिस्‍से नहीं पड़ता' - स्‍...
clicks 0  Vote 0 Vote  10:57am 14 Nov 2018

ब्राहमणवाद जातिसूचक संज्ञान नहीं, विचारधारा

डॉ सेवा सिंहके लियेब्राहमणवादजातिसूचक संज्ञान नहीं एक विचारधारा है, वचर्स्वी वर्गों के प्रभुत्व को आधार प्रदान करने वाली एक सत्तामूलक विचारधारा। बौ...
clicks 3  Vote 0 Vote  11:40am 6 Nov 2018

मुखर बौद्धिक कवि : कुमार मुकुल ... कृष्ण समिद्ध

( 2017 - आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन है...वो मुझे भी चाहिए था।)कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को लांघकर बार बार प्रासंगि...
clicks 24  Vote 0 Vote  11:03am 5 Nov 2018

अँधकार के बाद लौटकर आती सुबह जैसी कविताएँ - शहंशाह आलम

चर्चित किताब : बयालीस - 'एक उर्सुला होती है' ( कुमार मुकुल )            इससे पहले भी युद्घ हुए थे           पिछला युद्ध जब ख़त्म ह...
clicks 4  Vote 0 Vote  10:27am 3 Nov 2018

गहरे प्रेम की गहरी कविताएँ ... प्रांजल धर

‘एक उर्सुला होती है’कवि कुमार मुकुल का ताज़ा कविता संग्रह है जिसकी कविताएँ जीवन और समाज में छीजते जा रहे प्रेम को केन्द्र में लाते हुए एक सार्थक-साहित्...
clicks 16  Vote 0 Vote  1:55pm 2 Nov 2018

सृजनात्‍मक जिजीविषा और जिगीषा का प्रतीक 'उर्सुला' - अनिल अनलहातु

हर रचनात्‍मक यात्रा में सहजीवन के रूप में किसी न किसी 'उर्सुला'की मौजूदगी अवश्‍य रहती है, इस संग्रह की कविताएं इसी बात की तस्‍दीक करती हैं। इस तरह कुमार म...
clicks 17  Vote 0 Vote  11:15am 1 Nov 2018
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