स्वप्न मेरे

इक पुरानी रुकी घड़ी हो क्या ...

यूँ ही मुझको सता रही हो क्या  तुमकहीं रूठ करचली हो क्या उसकी यादें हैं पूछती अक्सर मुझसे मिलकर उदास भी हो क्या मुद्दतों से तलाश है जारीज़िन्दगीमुझसे अजन...
clicks 7  Vote 0 Vote  12:44pm 6 Jul 2020

चन्द यादों के कुछ करेले हैं ...

गम के किस्से, ख़ुशी के ठेले हैंज़िन्दगी में बहुत झमेले हैंवक़्त का भी अजीब आलम हैकल थी तन्हाई आज मेले हैंबस इसी बात से तसल्ली हैचाँद सूरज सभी अकेले हैंभूल जा...
clicks 21  Vote 0 Vote  3:23pm 29 Jun 2020

ईगो ...

दो पीठ के बीच का फांसला मुड़ने के बाद ही पता चल पाता है हालांकि इन्च भर दूरी उम्र जितनी नहीं पर सदियाँ गुज़र जाती हैं तय करने में "ईगो" और "स्पोंड़ेलाइटिस" क...
clicks 21  Vote 0 Vote  9:35pm 22 Jun 2020

यूँ ही गुज़रा - एक ख्याल ...

शबनम से लिपटी घास पर नज़र आते हैं कुछ क़दमों के निशानसरसरा कर गुज़र जाता है झोंका जैसे गुजरी हो तुम छू कर मुझे हर फूल देता है खुशबू जंगली गुलाब की  खुरदरी हथ...
clicks 19  Vote 0 Vote  1:56pm 15 Jun 2020

सच के झूठ ... क्या सच ...

सच जबकि होता है सच लग जाती है मुद्दत सच की ज़मीन पाने में झूठ जबकि नहीं होता सच फ़ैल जाता है आसानी से सच हो जैसे हालांकि अंत जबकि रह जाता है केवल सच पर सच को मि...
clicks 22  Vote 0 Vote  3:49pm 8 Jun 2020

सपने आँखों में

किसी की आँखों में झाँकना उसके दर्द को खींच निकालना नहीं होता  ना ही होता है उसके मन की बात लफ्ज़-दर-लफ्ज़ पढ़नाउसकी गहरी नीली आँखों में प्रेम ढूँढना तो बिल...
clicks 18  Vote 0 Vote  12:04pm 1 Jun 2020

क्या सच में ...

अध्-खुली नींद में रोज़ बुदबुदाता हूँ एक तुम हो जो सुनती नहीं हालांकि ये चाँद, सूरज ... ये भी नहीं सुनते और हवा ...  इसने तो जैसे “इगनोरे” करने की ठान ली है   &n...
clicks 42  Vote 0 Vote  12:02pm 25 May 2020

किसका खेल

कितना कुछ होता रहता है और सच तो ये भी है कितना कुछ नहीं भी होता ... फिर भी ... बहुत कुछ जब नहीं हो रहा होता  कायनात में कुछ न कुछ ज़रूर होता रहता है जैसे ...  मैंन...
clicks 26  Vote 0 Vote  9:15pm 18 May 2020

कृष्ण

बहाने से प्रश्न करता हूँ स्वयं से ... पर उलझ जाता हूँ अपने कर्म से ... असम्भव को सम्भव करने के प्रयास में फिर फंस जाता हूँ मोह-जाल में ... फिर सोचता हूँ, ऐसी चाह रख...
clicks 37  Vote 0 Vote  12:47pm 11 May 2020

चाहत या सोच की उड़ान ... ?

पूछता हूँ अपने आप से ... क्या प्रेम रहा है हर वक़्त ... या इसके आवरण के पीछे छुपी रहती है शैतानी सोच  ... अन्दर बाहर एक बने रहने का नाटक करता इंसान ...क्या थक कर अन्...
clicks 37  Vote 0 Vote  8:50pm 2 May 2020
[ Prev Page ] [ Next Page ]
 
CONTACT US ADVERTISE T&C [ FULL SITE ]

Copyright © 20018-2019