Amit Mishra

घर से निकले हैं पढ़ने को....

घर  से  निकले  हैं  पढ़ने  कोजीवन  के पथ  पर  बढ़ने कोकदम  है अगला आज बढ़...
clicks 17  Vote 0 Vote  4:33pm 12 Oct 2018

ग़र इश्क़ का कोई सार लिखूं

ग़र इश्क़ का कोई सार लिखूंउसको ही बारंबार लिखूंजो प्रेमपाश का वर्णन होउसकी बाहों का हार लिखूंकविता की पहली पंक्ति वोजब लय में कोई गज़ल लिखूंमैं एक सरोवर हो...
clicks 15  Vote 0 Vote  5:23pm 20 Sep 2018

छुपाया ना करो...

यूँ  तन्हा  हर  रात  सुलाया  ना  करोफ़िर ख़्वाबों में मिलने आया ना करो&#...
clicks 31  Vote 0 Vote  10:40am 17 Sep 2018

सोमवार - एक व्रत कथा

आज सोमवार है....पुष्पा आज जल्दी उठ गई है...उसे व्रत जो रखना है...तो चार बजे उé...
clicks 28  Vote 0 Vote  11:09am 4 Sep 2018

आज का इंसान इतना सयाना क्यों है

ये आज का इंसान इतना सयाना क्यों हैअब आदमी ही आदमी से अनजाना क्यों हैझूठों की बस्ती है क़ीमत लहू की सस्ती हैफिर सच बयानी पे जान का जुर्माना क्यों हैतकनीक से...
clicks 31  Vote 0 Vote  5:09pm 31 Aug 2018

इतवार...एक लघु कथा

आज फिर इतवार है...वही इतवार जिसका छोटू और बबली बड़ी बेसब्री से इंतज़ार कर...
clicks 35  Vote 0 Vote  12:43pm 19 Aug 2018

एक बेहतर हिंदुस्तान..

मुल्क के सिपहसालारों को भी कुछ काम दिया जाएसफेदपोशों को दग़ाबाज़ी का&nbs...
clicks 11  Vote 0 Vote  9:38am 16 Aug 2018

माहताब की लाली

माहताब की लाली को बादलों में छुपाया ना करोयूँ  बेवजह  रूखसारों  पे जुल्फें  गिराया  ना करोबाहों  के  घेरों  में सिमटो  तो  नज़रें  झुका लो...
clicks 19  Vote 0 Vote  2:36pm 13 Aug 2018

धरोहर..

धरोहर.. हाँ यही नाम दिया है मैंने तुम्हारी यादों और तुम्हारे वादों को....
clicks 49  Vote 0 Vote  10:54am 28 Jul 2018

मौन भला हूँ

मैं  गुलों के  जैसा महकता  नही हूँसितारा हूँ लेकिन चमकता नही हूँज़मा...
clicks 68  Vote 0 Vote  10:52am 24 Jul 2018
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