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रात अभी बाकी हैं,कोई सितारा टिमटिमाया हैं..

दर्द में डूब कर कुछ करार आया हैं,जुबां पर सच पहली बार आया हैं...मंज़िले अभी दूर हैं करवा बढ़ता रहे,बिजलिया गिरी नही,बस अंधेरा सा छाया हैं,हौसला न तोड़ना,हाथ अब न...
clicks 44  Vote 0 Vote  1:52pm 8 Apr 2019

कभी-कभी पुरानी डायरी खोल लेता हूँ.....!

कुछ अनकही बातों को बोल लेता हूँ,कभी-कभी पुरानी डायरी खोल लेता हूँ,हरेक लब्ज़ में लम्हो के समुन्दर है,जाने कैसे कागज़ में सब उड़ेल देता हूँ,किस नकाब में कौन सा ...
clicks 12  Vote 0 Vote  8:53am 21 Mar 2019

टूट-टूट कर कई बार जुड़ा हूँ मैं......

बड़ी मुश्किल से इस बार खड़ा हूँ मैं,टूट-टूट कर कई बार जुड़ा हूँ मैं..जहाँ हूँ मैं बस तबाही हैं बर्बादी हैं,लोग ये भी कहते हैं बहुत कर्मजला हूँ मैं,बनाने वाले घर ...
clicks 57  Vote 0 Vote  11:34am 1 Mar 2019

आईने तोड़ देने से शक्ले नही बदला करती

आईने तोड़ देने से शक्ले नही बदला करतीसिर फोड़ने से अकले नही बदला करती,कई बार मैंने किसानों को सूली पे रखके देखा हैंहमारे गांव की खुदगर्ज़ फसले न...
clicks 15  Vote 0 Vote  10:11am 24 Feb 2019

इतनी प्यास थी कि फिर हद से गुजरने में वक़्त लगा...

इश्क़ की गहराई में उतारने में वक़्त लगा,टूट गया मगर बिखरने में वक़्त लगा...तूने मेरे नसीब में डूबना लिख तो दिया,बीच मझधार मगर पाँव धरने में वक़्त लगा,जब उसने कई ...
clicks 15  Vote 0 Vote  12:19pm 10 Feb 2019

सारे फ़रिश्ते घबरा जल्दी घर लौट आये हैं....

सारे फ़रिश्ते घबरा जल्दी घर लौट आये हैं,रात काली हैं या चाँद ने अंधेरे बिछायें हैं,कुछ मग़रूरओ  के हौसले इतने बुलंद हैं,रोशनी के डर से कितने सूरज बुझाये है...
clicks 58  Vote 0 Vote  11:12am 30 Jan 2019

जो चाँद पलकों पे था आँसू संग उतारा हैं.....

तुम गांडीवधारी हो या तुम्हे ख़सारा हैंहम दांव खेला चुके,अब समर तुम्हारा हैं,तुम फ़क़द तमाशा देखो,फब्तियां उड़ाओ,जो चाँद पलकों पे था आँसू संग उतारा हैं,कई रोज़ ...
clicks 35  Vote 0 Vote  12:33pm 18 Jan 2019

दोस्त बहुत हैं यहाँ कोई यार नही....!!!

किसी के आगे अब खुलने को हम तैयार नहीदोस्त बहुत हैं यहाँ कोई यार नही,मुश्किलों का समुन्दर हैं,तकलीफों के पहाड़ हैं,इस ताल्लुख़ से उबरने के कोई आसार नही,हाथ म...
clicks 44  Vote 0 Vote  9:06am 15 Jan 2019

अंधेरे ही फैलाने को यहाँ उजाला निकलता हैं.....

यहाँ हरेक सुहागिन का बदस्तूर हलाला निकलता हैं,दून से दवरा पहुचते परियोजना का दिवाला निकलता हैं,कौन सा दामन पाक हैं किन हाथों पे क़लम रखूँ ,मदो की बंदरबाट म...
clicks 27  Vote 0 Vote  3:46pm 7 Jan 2019

बहुत गरूर था हमे,आसमानों में आशिया बनाना था....

बहुत गरूर था हमे,आसमानों में आशिया बनाना था,मगर किश्मत में टूटकर पंख,बस फड़फड़ाना था,लाख मुसीबतों को जीत,जैसे ही मंज़िल को पाना था,तमाम कमज़ोरियों को उसी वक़्त...
clicks 75  Vote 0 Vote  1:49pm 4 Jan 2019
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