Nayekavi

रास छंद "कृष्णावतार"

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हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ।घोर घटा में, कड़क रहीं थी, दामिनियाँ।हाथ हाथ को, भी नहिं सूझे, तम गहरा।दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।।यमुना मैया, भी ऐसे ...
clicks 4  Vote 0 Vote  8:43am 12 Jan 2022

ग़ज़ल (राह-ए-उल्फ़त में डट गये होते)

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बह्र:- 2122  1212  22राह-ए-उल्फ़त में डट गये होते,खुद ब खुद ख़ार हट गये होते।ज़ीस्त से भागते न मुँह को चुरा,सब नतीज़े उलट गये होते।प्यार की इक नज़र ही काफी थी,पास हम उन...
clicks 25  Vote 0 Vote  10:54am 8 Jan 2022

पुटभेद छंद "बसंत छटा"

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छा गये ऋतुराज बसंत बड़े मन-भावने।दृश्य आज लगे अति मोहक नैन सुहावने।आम्र-कुंज हरे चित, बौर लदी हर डाल है।कोयली मधु राग सुने मन होत रसाल है।।रक्त-पुष्प लदी ट...
clicks 76  Vote 0 Vote  9:03am 5 Jan 2022

आंग्ल नव-वर्ष दोहे

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प्रथम जनवरी क्या लगी, काम दिये सब छोड़।शुभ सन्देशों की मची, चिपकाने की होड़।।पराधीनता की हमें, जिनने दी कटु पाश।उनके इस नव वर्ष में, हम ढूँढें नव आश।।सात दश...
clicks 6  Vote 0 Vote  12:23pm 1 Jan 2022

रूपमाला छंद "राम महिमा"

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राम की महिमा निराली, राख मन में ठान।अन्य रस का स्वाद फीका, भक्ति रस की खान।जागती यदि भक्ति मन में, कृपा बरसी जान।नाम साँचो राम को है, लो हृदय में मान।।राम क...
clicks 27  Vote 0 Vote  9:31am 28 Dec 2021

हाइकु (नारी)

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नारी की पीड़ादहेज रूपी कीड़ाकौन ले बीड़ा?**दहेज तुलाएक पल्ले समाजदूजे अबला।**पंचाली नारपुरुष धर्मराजचढ़ाते दाव।**बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया26-07-19...
clicks 31  Vote 0 Vote  8:57am 25 Dec 2021

शक्ति छंद "फकीरी"

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शक्ति छंद फकीरी हमारे हृदय में खिली।बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।वृषभ से पड़ें हम रहें हर कहीं...
clicks 88  Vote 0 Vote  10:55am 12 Dec 2021

पुण्डरीक छंद "राम-वंदन"

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मेरे तो हैं बस राम एक स्वामी।अंतर्यामी करतार पूर्णकामी।।भक्तों के वत्सल राम चन्द्र न्यारे।दासों के हैं प्रभु एक ही सहारे।।माया से आप अतीत शोक हारी।हा...
clicks 102  Vote 0 Vote  8:39am 7 Dec 2021

ग़ज़ल (मौत का कुछ तो इंतज़ाम करें)

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बह्र:- 2122  1212  22मौत का कुछ तो इंतज़ाम करें,नेकियाँ थोड़ी अपने नाम करें।कुछ सलीका दिखा मिलें पहले,बात लोगों से फिर तमाम करें।सर पे औलाद को न इतना चढ़ा,खाना पीन...
clicks 23  Vote 0 Vote  8:11am 4 Dec 2021

पिरामिड "सेवा"

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(1)हाँ सेवा,कलेवायुक्त मेवा,परम तुष्टिजीवन की पुष्टिवृष्टि-मय ये सृष्टि।***(2)दो सेवा?प्रथमदीन-हितकर्म में रत,शरीर विक्षत?सेवा-भाव सतत।***बासुदेव अग्रवा...
clicks 151  Vote 0 Vote  9:38am 27 Nov 2021
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