ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद - Zindagi Zindabad

48 - हवा में उड़ता जाए मेरा दीवाना दिल

स्कूटर के आने के बाद शुरू के कुछ दिन तो उसे चलाना सीखने में निकले. पहले दिन ही अपने घर से सड़क तक की गली को पार करने में ही लगभग पंद्रह मिनट लग गए थे. पहले लगा क...
clicks 41  Vote 0 Vote  11:54pm 13 Jun 2021

47 - चलते रहना ज़िन्दगी की निशानी है

सामाजिक जीवन में गतिशीलता स्कूटर आने के पहले से बनी हुई थी, स्कूटर आने के बाद उसमें और गति आ गई थी. आवाजाही पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ गई थी. सामाजिक कार्यक्रम...
clicks 93  Vote 0 Vote  12:20am 25 Jan 2021

46 - चेहरे पर भावनात्मक ख़ुशी और आँखों में नमी

सामाजिक जीवन में जो भागदौड़ बनी हुई थी, उसमें उन्हीं दिनों थोड़ा सा अवरोध रहा जबकि हम बिना कृत्रिम पैर के रहे. यद्यपि उस दौरान भी कुछ सामाजिक, सांस्कृतिक का...
clicks 96  Vote 0 Vote  11:38pm 27 Dec 2020

45 - ख़ामोशी से गुजर जाते हैं दर्द कितने

दाहिने पंजे के दर्द से कोई राहत नहीं मिल रही थी. उसकी स्थिति देखकर बहुत ज्यादा लाभ समझ भी नहीं आ रहा था. इस दर्द में उँगली भी अपने रंग-ढंग दिखाने में लगी थी. ...
clicks 107  Vote 0 Vote  12:37pm 13 Dec 2020

44 - इंतजार, इंतजार और बस इंतजार

कुछ समय की मेहनत, कोशिश के बाद रोजमर्रा के काम कुछ हद तक करने सम्भव हो गए थे. जो कृत्रिम पैर शरीर का हिस्सा न था उसे स्वीकार कर लिया था मगर अभी उसके साथ सही स...
clicks 83  Vote 0 Vote  11:28pm 24 Nov 2020

संघर्ष के पलों से निकली ख़ुशी का नाम ही ज़िन्दगी है

ऐसा कहा जाता है कि हमारे कार्यों के अनुसार ही हमें फल प्राप्त होता है. ऐसा भी कहा जाता है कि इस जन्म में व्यक्ति के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसमें बहुत कुछ पूर...
clicks 91  Vote 0 Vote  10:27pm 3 Nov 2020

39 - ज़िन्दगी को ज़िन्दगी से जीतने की कोशिश में

पैर लगने का सुख भी था और साथ ही यह संतोष भी कि अब एलिम्को तक की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. अपने नए साथियों (कृत्रिम पैर और छड़ी) के साथ जीवन का अगला सफ़र नए सिरे से ...
clicks 103  Vote 0 Vote  3:17pm 13 Sep 2020

37 - छोटे-छोटे कदमों का लड़खड़ाना और चल पड़ना

समय अपनी तरह से हमारी परीक्षा लेने में लगा हुआ था. एलिम्को में हमारे चलने का अभ्यास जैसे उसी का अंग बना हुआ था. जिस समय पैर का नाप देने आये थे, उस समय लगा था क...
clicks 115  Vote 0 Vote  6:25pm 15 Aug 2020

36 - ज़िन्दगी तुझे ज़िन्दगी जीना सिखा रहे हैं

एलिम्को में नियमित रूप से जाना हो रहा था. चलने का अभ्यास पहले की तुलना में कुछ बेहतर होने लगा था. अब कृत्रिम पैर को बाँधने में पहले जैसी उलझन नहीं होती थी. क...
clicks 182  Vote 0 Vote  3:42pm 3 Aug 2020

35 - प्रतिद्वंद्विता दर्द से और ज़िद चलते रहने की

एलिम्को के बाहर की दुनिया ही अकेली दर्द भरी नहीं दिखाई देती थी, एलिम्को के भीतर की दुनिया भी उसी दर्द से भरी नजर आई. वहाँ जैसे-जैसे दिन निकलते जा रहे थे वैस...
clicks 177  Vote 0 Vote  2:02pm 25 Jul 2020
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