ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र

नयी किताबें सूचनार्थ

मित्रों मेरा दूसरा उपन्यास "शिकन के शहर में शरारत"और नया कविता संग्रह "प्रेम नारंगी देह बैंजनी"किताबगंज प्रकाशन से प्रकाशित होकर आया है जिनके बारे में स...
clicks 25  Vote 0 Vote  1:38pm 12 Apr 2019

सफ़ेद नकाबपोश चेहरे...

दहशत का लिफाफा हर दहलीज को चूमता रहा और सुर्ख रंग से सराबोर होता रहा हर चेहरा फिर किसके निशाँ ढूँढते हो अब ?तुमने दहशतें बोयी हैं फसल लहलहा कर आयी है सदियो...
clicks 27  Vote 0 Vote  4:53pm 18 Feb 2019

शिशुत्व की ओर

बन चुकी है गठरी सी सिकुड़ चुके हैं अंग प्रत्यंग बडबडाती रहती है जाने क्या क्या सोते जागते, उठते बैठते पूछो, तो कहती है - कुछ नहीं सिर्फ देह का ही नह...
clicks 27  Vote 0 Vote  11:58am 7 Feb 2019

ईश्वर गवाह है इस बार ....

मुझे बचाने थे पेड़ और तुम्हें पत्तियां मुझे बचाने थे दिन और तुम्हें रातें यूँ बचाने के सिलसिले चले कि बचाते बचाते अपने अपने हिस्से से ही हम महरूम ह...
clicks 57  Vote 0 Vote  1:04pm 17 Dec 2018

मुझे ऊपर उठना था

मुझे ऊपर उठना था अपनी मानवीय कमजोरियों से आदान प्रदान के साँप सीढ़ी वाले खेल से मैंने खुद को साधना शुरू किया रोज खुद से संवाद किया अपनी ईर्ष्या अपनी कटुता ...
clicks 42  Vote 0 Vote  1:03pm 15 Dec 2018

उम्र के तीसरे पहर में मिलने वाले

ओ उम्र के तीसरे पहर में मिलने वाले ठहर, रुक जरा, बैठ , साँस ले कि अब चौमासा नहीं जो बरसता ही रहे और तू भीगता ही रहे यहाँ मौन सुरों की सरगम पर की जाती है अराधना ...
clicks 57  Vote 0 Vote  1:28pm 9 Dec 2018

कुछ_ख्याल_कुछ_ख्वाब

1मेरे इर्द गिर्द टहलता हैकोई नगमे सामैं गुनगुनाऊं तो कहता हैरुक जरा इस कमसिनी पर कुर्बान हो तो जाऊँजो वो एक बार मिले तो सहीखुदा की नेमत सा2दिल अब न दरिया...
clicks 107  Vote 0 Vote  2:37pm 22 Nov 2018

राम तुम आओगे

राम क्या तुम आ रहे हो क्या सच में आ रहे हो राम तुम जरूर आओगे राम तुम्हें जरूर आना ही होगा आह्वान है ये इस भारतभूमि का हे मर्यादापुरुषोत्तम मर्य...
clicks 115  Vote 0 Vote  4:43pm 6 Nov 2018

बुरा वक्त कहता है

बुरा वक्त कहता है चुप रहो सहो कि अच्छे दिन जरूर आयेंगे सब मिटा दूँ, हटा दूँ कि आस की नाव पर नहीं गुजरती ज़िन्दगी छोड़ दूँ सब कुछ हो जाऊँ गायब समय के परिदृश्य स...
clicks 58  Vote 0 Vote  4:31pm 29 Oct 2018

जिसकी लाठी उसकी भैंस की तरह

हुआ करते थे कभी चौराहों पर झगडे तो कभी सुलह सफाई वक्त की आँधी सब ले उड़ी आज बदल चुका है दृश्य आपातकाल के मुहाने पर खड़ा देश नहीं सुलझा पा रहा मुद्दे चौराहों प...
clicks 144  Vote 0 Vote  12:44pm 23 Oct 2018
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