मीमांषा- Meemaansha

Online Diaries - 01

यही सुकून है मेरे लिए, यही तलाश और तलाश की मंजिल भी।लिखने के लिए सबसे पहली शर्त है आलोचना से बचने की कोशिश से मुक्त होना।  ये मुक्ति ही लिखने की दुनिया ...
clicks 18  Vote 0 Vote  11:33pm 10 Jul 2018

सागर पर पहरे हैं

सागर पर पहरे हैं,सरिताएं आएंगीं अबकहाँ जायेंगीं,हर एक मुहाने परडेल्टा कुछ ठहरे हैं,किससे मांगेंगी मदद अपने में सभी व्यस्त किस पर भरोसा करें चेहर...
clicks 6  Vote 0 Vote  9:41am 10 Jul 2018

"विलोम शब्द"

तुम नहीं थे, मैं नहीं जानती थी ख़ुशी,पर कभी, तुम्हारे न होने से,जानती हूँ 'ख़ुशी के बिना'कुछ लम्हें;तुम्हारे बिना मैं नहीं जानती थी 'अकेलापन' पर तुम...
clicks 129  Vote 0 Vote  12:51pm 27 Dec 2015

'ब्याहता'और 'दहेज़'

    'ब्याहता'मेरे लिए, फूल फूल नहीं है,एक सपनीली लड़की कीनिर्भार हँसी है,  और... इसी तरहजलता हुआ चूल्हा,उठता हुआ धुँआ,केवल धुआँ नहीं है, एक ब्य...
clicks 100  Vote 0 Vote  3:07pm 20 Dec 2015

"इसे,ये मीठा शहद, और है तीखी मिर्ची"

ये पूरे की मांग नहीं है,   न ही अधूरेपन की खलिश है, न ही प्रार्थना, न ही विनय है, ये स्वाभाविक,लेने देने की रस्में हैं, होती ही हैं,प्रीत अगर हो,र...
clicks 108  Vote 0 Vote  1:54pm 13 Dec 2015

"सपनों की क्या बात करें"

सपनों की क्या बात करें...जो मिला नियति से,उसको लें हथियार बना, अवनति से,दो दो हाथ करें, सपनों की क्या बात करें...जो चलते है तलवारों पर, उनको असिधारों से...
clicks 130  Vote 0 Vote  11:32am 6 Dec 2015

"इतना क्या उदास होना"

इतना क्या उदास होना;ये लम्बे रास्ते  हैं, हैं मगर कुछ दूर तक ही, उम्र को यूँ अज़ल तक ढोना नहीं है, हर कुछ, तपे जो आग में, सोना नहीं है।  यूँ पूरी किस...
clicks 77  Vote 0 Vote  7:23am 7 Nov 2015

"न गुज़रे अश्क़ से तो रास्ता क्या"

मेरे पास, तेरे आने से,दिन ज्यादा हुआ, हुई रात कम,इतना अतिरेक हुआ कहने को,क़ि हुए लब चुप,और हुई बात काम;तू मुझमें अमानत-ए-जिंदगी की  आशा  प्रिय !तू मु...
clicks 116  Vote 0 Vote  12:03am 26 Jun 2015

"अफ़साना-ए-जिंदगी"

*************************कोई भी मंजिल मेरी मंज़िल न थी हर मंज़िल के करीब यही जाकर जाना,अफ़साना-ए-जिंदगी बस एकरास्ता लगती है मुझे। ************************ जब लगता था कि कुछ न...
clicks 94  Vote 0 Vote  9:40am 2 Jun 2015

"मगर मिटती नहीं"

तुम्हारेमात्र होने से ही मन परितृप्त है, तबसे मगर, तुम तक राह कोईहै जो, फिरदिखती रही, तुम्हारी अछूती, अदृश्य, अंजानी  तरंगों में, महसूस क...
clicks 112  Vote 0 Vote  7:22am 31 Oct 2014
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