Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
माँ-बहनों के लाडले, सजनी के सिन्दूर। रखवाले अब हो गये, भारत माँ से दूर।भाषण तक सीमित ने हों, भीषण-भाषणवीर।जन-गण अब यह चाहता, नेता हों प्रणवीर।।जन-जन में प्रतिशोध की, धधक रही है आग।कब बैरी के खून से, खेलोगे तुम फाग।।दिखा दीजिए जगत को, अपना आज वजूद।पापी पाकिस्तान को, कर...
clicks 1 View   Vote 0 Vote   9:00pm 16 Feb 2019
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
      नोआ प्यूरिफोए ने अपने कार्य का आरंभ तीन टन मलबे के साथ किया। उस मलबे को लॉस एन्जिल्स के वॉट्स इलाके में 1965 में हुए दंगों के बाद एकत्रित किया गया था। टूटी हुई साईकिल के पहियों, गेंदों, ख़राब टायरों, पुराने टी.वी. सेटों – ऐसी वस्तुएँ जो अब उपयोगी नहीं रहीं थें – उ...
clicks 1 View   Vote 0 Vote   8:45pm 16 Feb 2019
Blogger: SANGH SHEEL 'SAGAR' at MERI SOCH MERI MANJIL...
बड़ा ख़ुश ख़्वाब में था वो।गया जिस आब में था वो।।उसका  वो  हाल  चाहिए।मुझे  मेरा  लाल  चाहिए।मेरी  छोटी  सी  है  माँग।अब  कौन  भरेगा  माँग?माथे  का  ढाल  चाहिए।मुझे  मेरा  लाल  चाहिए।किसी  के कंधे  न आये ।वो खुद चलकर के आये।।मस्तानी वो चाल चाह...
clicks 4 View   Vote 0 Vote   12:34pm 16 Feb 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at चर्चामंच...
आइए शनिवार की चर्चा प्रारम्भ करता हूँ!  डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  -------------------------- दोहे   "बदला लो सरकार"   उच्चारण  -------------------------- हम पलाश के फूल,सजे ना गुलदस्ते में  व्याकुल पथिक  -------------------------- उड़ी या पुलवामा  बावरा मन पर  सु-मन (Suman Kapoor)  -------------------------- शीर्षकहीन  *रणभूमि :एक रण जीवन...
clicks 5 View   Vote 0 Vote   3:00am 16 Feb 2019
Blogger: Pratibha Saksenas at शिप्रा की लहर...
*नहीं ,आँसू नहीं ,आग है !धधक उठा अंतस् रह-रह उठती लपटें ,कराल क्रोध-जिह्वाएँ रक्तबीज-कुल का नाश,यही है संकल्प .बस !शान्ति नहीं ,चिर-शान्त करना है  सारा भस्मासुरी राग.यह रोग ,रोज़-रोज़ का चढ़ता बुख़ार ,यह विकार ,मिटाना है जड़-मूल से .नहीं मिलेगी शान्ति, कहीं नहीं ,जब तक ...
clicks 8 View   Vote 0 Vote   2:16am 16 Feb 2019
Blogger: माधवी रंजना at DAANAPAANI...
गुजरात के अंबाजी में दूसरा प्रमुख मंदिर है गब्बर मंदिर। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को शक्ति पीठ का वास्तविक स्थान कहा जाता है। गुजराती में इसे मां अंबाजी मूल स्थान शक्तिपीठ कहते हैं। इसलिए अक्सर अंबा जी के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु गब्बर मंदिर भी जरूर जाते हैं। गब...
clicks 11 View   Vote 0 Vote   12:00am 16 Feb 2019
Blogger: रश्मि at रूप-अरूप...
मन के अरण्य में स्मृतियों की बंजर हथेली परसूखे- झरे पात हैंएक-एक करचुन लूँबिखरी यादों कोइस उदास मौसम मेंपतझड़ के आख़री पत्ते की तरहऔर गुनगुनाती धूप मेंधीमे-धीमेदुख से बाहर आने काकोई रास्ता देखूँकि सुना हैवसंत की ऊँगलियों मेंजादू हैवो खिलाएगा पल्लव नयाउगेगा सरसो...
clicks 8 View   Vote 0 Vote   8:13pm 15 Feb 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
Laxmirangam: ब्लॉग पर पोस्ट की सूचना.: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर ही करें. गूगल + की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं. प्रिय पाठकगण, हाल ही में गूगल प्लस से एक संदेश आया कि...कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें....
clicks 4 View   Vote 0 Vote   2:12pm 15 Feb 2019
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at बावरा मन...
         १.आतंकी वार उड़ी या पुलवामा कितनी बार ।      २.शहीद लाल दामन में लपेटे रोया तिरंगा ।     ३.टूटी चूड़ियाँ माँग बिन सिन्दूर वीर की बेवा |14 फरवरी 2019 पुलवामा आंतकी हमला | शहीद जवानों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली ||सु-मन ...
clicks 8 View   Vote 0 Vote   1:00pm 15 Feb 2019
Blogger: jayanti jain at स्वास्थ्य -से...
Mahayogi Sri Arvind श्री अरविन्द आश्रम में कोई ध्यान –योग की कोई प्रक्रिया ,कर्मकांड ,प्रार्थना,यज्ञ,पूजा, गुरु,मूर्ति ,मंदिर आदि नहीं है l अथार्त वहाँ पर इस हेतु कोई स्पष्ट विधि नहीं सिखाई जाती है l  पूर्ण योग सचेतना में जीना है l सजगता में चोबीस घंटे जीना है l यह बाहर देखने का योग ...
clicks 0 View   Vote 0 Vote   10:34am 15 Feb 2019
Blogger: Bal Sajag at बाल सजग...
"पानी का प्यासा "जो पानी का प्यासा था, उसे हर क्षण एक शमशान की जगह महसूस होता हैउसे न जीने की तमन्ना महसूस होता है | उसके इतने ही क्षण में आत्मा में,ख़ामोशी सी छा जाती है | पानी की एक बूँद आने की आशा,सी हो जाती है | इसकी अहमियत की मूल्य नहीं,और सोचने के लिए किसी के पास दिल है कि ...
clicks 10 View   Vote 0 Vote   6:51am 15 Feb 2019
Blogger: Sunita Agrawal at एक नज़र ..चलते च...
वजहें तमाम थीतुम्हे प्यार न करने कीपर प्यार के लिए किसी  वजह की जरूरत नहीं पड़तीइतना ही समझा मैंनेऔर  घुलते गए तुम मुझमेंजैसे अंधकार में घुलता है प्राची का लालित्यऔर फूटने लगता है उजालाएक छोर सेऔर धीरे धीरे हड़प लेता हैपूरा  आसमानउसने देखाहुआ मन बसंतउसने छुआहुयी ...
clicks 9 View   Vote 0 Vote   7:22pm 14 Feb 2019
Blogger: Himkar Shyam at शीराज़ा [Shiraza]...
हिज्र  की रात तो ढली ही नहीं वस्ल की  आरज़ू गई ही नहीं मेरे दिल में थी बस तेरी चाहत आरजू  और कोई थी  ही नहीं मैंने तुझको  कहाँ  नहीं  ढूँढा यार तेरी ख़बर मिली ही नहीं इश्क़ से थी हयात में लज़्ज़त ज़िन्दगी बाद तेरे जी ही नहीं मिन्नतें इल्तिज़ा  न कम की थी बात लेकिन कभी सुनी ही...
clicks 7 View   Vote 0 Vote   6:36pm 14 Feb 2019
Blogger: Manisha at www.HindiDiary.com...
आरक्षण अभी और कई तरीकों से लागू होगा जिस तरह से सरकार अपने खर्चे कम न करके जनता पर और बोझा डालने के लिये नये नये कर (टैक्स) लगाने के तरीके ढूंढ़ती रहता है उसी तरह से राजनैतिक पार्टियां और नेता लोग अपना वोट बैंक बनाने के लिये नये नये वर्गों को... पूरी ब्लॉग पोस्ट पढ़ने के लि...
clicks 0 View   Vote 0 Vote   11:20am 14 Feb 2019
Blogger: Dr. Harimohan Gupt at Dr. Hari Mohan Gupt...
   बेलेन्टाइन डेबेलेन्टाइन डे  मना, हो  गई  उनसे  भूल,एक अपरचित को दिया, बस गुलाब का फूल |            उनसे बोली वह प्रिये, बैठो मेरे पास,            बेलेन्टाइन डे रहा, होना है कुछ ख़ास |चलो चलें होटल प्रिये , बैठेंगे एकान्त,बातें होंगी प्य...
clicks 12 View   Vote 0 Vote   9:52am 14 Feb 2019
Blogger: akhtar khan akela at आपका-अख्तर खा...
सआद नसीहत करने वाले कु़रान की क़सम (तुम बरहक़ नबी हो) (1)मगर ये कुफ़्फ़ार (ख़्वाहमख़्वाह) तकब्बुर और अदावत में (पड़े अंधे हो रहें हैं) (2)हमने उन से पहले कितने गिरोह हलाक कर डाले तो (अज़ाब के वक़्त) ये लोग चीख़ उठे मगर छुटकारे का वक़्त ही न रहा था (3)और उन लोगों ने इस बात से ताज्जु...
clicks 8 View   Vote 0 Vote   8:30am 14 Feb 2019
Blogger: Deepak Kumar Bhanre at .मेरी अभिव्यक...
चलो एक कदम और बढाकर तो देखें ,अपने अंदर के हुनर को आजमाकर तो देखें ।माना कि खुद के अंदर कभी झाँका नहीं ,स्वयं को पहचानने की रही जिज्ञासा नहीं,प्रतिभा को अपनी  कभी आँका नहीं ,क्षमता के अनुरूप खुद को तराशा नहीं।करते  रहे औरों की सुनकर अब तक ,मन की बात सुनने की न थी फुरसत ,स...
clicks 11 View   Vote 0 Vote   6:49am 14 Feb 2019
Blogger: apramay at बिड़वा.......
कभी कभी कोई कविता अंदर से घुमड़ती हुई धीरे धीरे अंगुलियों के पास आकरबादल की तरह छा जाती है,कागज का सा खेतकुदाल की सी कलम मे&#...
clicks 13 View   Vote 0 Vote   10:41pm 13 Feb 2019
Blogger: पी सी गोदियाल at अंधड़ !...
पात-डालियों की जिस्मानी मुहब्बत,अब रुहानी हो गई,मौन कूढती रही जो ऋतु भर, वो जंग जुबानी हो गई।बोल गर्मी खा गये पातियों के,देख पतझड़ को मुंडेर पर,चेहरों पे जमी थी जो तुषार, अब वो पानी-पानी हो गई।सृजन की वो कथा जिसे,सृष्टिपोषक सालभर लिखते रहे,पश्चिमी विक्षोभ की नमी से पल मे, ख...
clicks 8 View   Vote 0 Vote   9:10pm 13 Feb 2019
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